दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद द्वारा लिखी गई किताब ''सनराइज ओवर अयोध्या'' के प्रकाशन और बिक्री पर रोक लगाने संबंधी याचिका पर सुनवाई 24 नवंबर तय की है।अधिवक्ता विनीत जिंदल ने अधिवक्ता राज किशोर चौधरी के जरिए दायर की याचिका में आरोप लगाया है कि खुर्शीद ने अपनी किताब में हिंदुत्व की तुलना आतंकवादी संगठनों- आईएसआईएस और बोको हराम जैसे समूहों से की है।
याची ने 'द सैफरोन स्काई' शीर्षक अध्याय के तहत पुस्तक से एक अंश का हवाला देते हुए कहा कि 'सनातन धर्म और शास्त्रीय हिंदू धर्म ऋषियों और संतों के लिए जाना जाता है। हिंदुत्व को एक मजबूत संस्करण से एक तरफ धकेल दिया जा रहा है। सभी मानकों के द्वारा आईएसआईएस और हाल के वर्षों के बोको हराम जैसे समूहों के जिहादी इस्लाम के समान एक राजनीतिक संस्करण बनाया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने कहा कि आरोपित बयान न केवल भड़काने और भड़काने वाला है बल्कि हिंदू धर्म के अनुयायियों के बीच भावनाओं को भी भड़काता है।
याची ने कहा पुस्तक की सामग्री हिंदू धर्म को आईएसआईएस और बोको हराम के बराबर होने का दावा करती है, जो आतंकवादी समूह हैं। यह पूरे हिंदू समुदाय के लिए काफी उत्तेजक और मानहानिकारक बयान है और एक समाज के बारे में उनके मूल्यों और गुणों पर भी सवाल उठता है। याचिका में कहा गया है कि आईएसआईएस और बोको हराम के लिए हिंदू धर्म की तुल्यता को एक नकारात्मक विचारधारा के रूप में माना जाता है। हिंदुओं का पालन किया गया है और हिंदू धर्म हिंसक, अमानवीय और दमनकारी है।
इस पुस्तक के प्रकाशन पर रोक लगाने के लिए पटियाला हाउस कोर्ट में चुनौती दी गई है। हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता द्वारा पुस्तक पर रोक की मांग करते हुए दायर याचिका कहा गया है कि उन्हें किताब का एक अंश पढ़कर झटका लगा, जिससे कथित तौर पर हिंदू धर्म से जुड़े बड़ी संख्या में लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची।