नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा पार्षदों का विकास फंड 25 लाख से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ करने के प्रस्ताव को रद्द कर दिया है। सरकार ने निगम के प्रस्ताव को रद्द करते हुए कोरोना महामारी के कारण खराब हुई वित्तीय व्यवस्था का हवाला दिया है।
दिल्ली सरकार के शहरी विकास विभाग ने पत्र में कहा है कि कोरोना महामारी को देखते हुए सांसद व विधायक निधि को बढ़ाने का प्रस्ताव जिस प्रकार रद्द किया गया है। इसी प्रकार पार्षदों के विकास निधि के बढ़ाने के प्रस्ताव को रद्द किया गया है। शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन ने उत्तरी निगम को फंड न बढ़ाने का भी निर्देश दिया है।
वहीं, निगम प्रभारी दुर्गेश पाठक ने कहा कि एक तरफ निगम अपने कर्मचारियों को वेतन व पेंशन देने में असमर्थ है। दूसरी ओर निगम ने अपने बजट में पार्षद विकास निधि को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।
उत्तरी निगम के महापौर जयप्रकाश ने कहा कि किसी भी पार्षद को कोई नया फंड नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि निगम में अभी बजट अनुमान पर चर्चा हो रही है। ऐसे में दिल्ली सरकार से आग्रह है कि इस आदेश को वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार निगम को अपना सुझाव दे सकती है, लेकिन अपने आदेश को थोप नहीं सकती है।