नए प्रस्ताव के तहत प्रत्येक गोदाम में एक प्रयोगशाला की स्थापना के बजाय एल -1 लाइसेंसधारी के पास गोदामों की संख्या कितनी भी हो कम से कम एक प्रयोगशाला का होना जरूरी है। आबकारी नीति 2022-23 के लिए जीओएम की सिफारिशों को उप-राज्यपाल की मंजूरी के बाद एक जून से लागू किया जाएगा।
पिछले साल आबकारी विभाग ने सभी थोक लाइसेंसधारियों को निर्माताओं से प्राप्त शराब का परीक्षण शुरू करने सहित पोर्टल पर इसे सत्यापित करने को कहा गया था कि नकली शराब नहीं है। हालांकि लैब स्थापित करने का प्रावधान गति नहीं पकड़ सका क्योंकि आबकारी नीति देर से लागू हुई। नीति को 17 नवंबर, 2021 से निजी ऑपरेटरों द्वारा खुदरा विक्रेता खोलने के साथ लागू किया गया था।
नीति के अनुसार थोक विक्रेताओं को निर्माताओं से मिलने वाले शराब के प्रत्येक बैच के लिए परीक्षण रिपोर्ट अपलोड करनी होगी। साथ ही यह वचन देना होगा कि शराब नकली नहीं है। नीति ने आगे सभी ब्रांड के गोदाम, खुदरा विक्रेताओं, होटलों, क्लबों और रेस्तरां से नमूना संग्रह करने के लिए विशेष टीमें गठित करने को भी कहा गया। इसमें कहा गया है कि कोई भी एल-1 लाइसेंस धारक या खुदरा दुकान का मालिक नकली शराब के कब्जे में मिलने पर पाया गया तो उसपर कार्रवाई की जाएगी।