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दिल्ली: फंड मिलने के तीन साल बाद भी एक भी बंदर की नहीं हुई नसबंदी, पहले साल जारी किए थे 5.43 करोड़ रुपये

Mon, 08 Nov 2021 07:37 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

केंद्र की ओर से आठ हजार बंदरों की नसबंदी के लिए विभाग को 5.43 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। अधिकारी का कहना है कि विभाग की ओर से तीन बार टेंडर निकाले गए, लेकिन बंदरों को पकड़कर नसबंदी करने के लिए किसी भी एजेंसी ने रुचि नहीं दिखाई।
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बंदर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्र की ओर से तीन साल पहले बंदरों की नसबंदी के लिए फंड जारी होने के बाद भी आज तक राजधानी में एक भी बंदर को पकड़ा नहीं जा सका है। वजह है बंदरों को पकड़ने के लिए किसी भी एजेंसी ने रुचि नहीं दिखाई है। इस वजह से दिल्ली के रिहायशी इलाकों में लगातार बंदरों का आंतक बढ़ रहा है।

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वन विभाग के अधिकारी के अनुसार, 2018 में तत्कालीन मुख्य वन्यजीव वार्डन ईश्वर सिंह ने बंदरों के प्रजनन को रोकने के लिए तीन साल की योजना तैयार की थी। इसके बाद  जनवरी 2019 में केंद्र ने लेप्रोस्कोपिक नसबंदी के माध्यम से बंदरों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए विभाग को धन जारी किया था। केंद्र की ओर से आठ हजार बंदरों की नसबंदी के लिए विभाग को 5.43 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। अधिकारी का कहना है कि विभाग की ओर से तीन बार टेंडर निकाले गए, लेकिन बंदरों को पकड़कर नसबंदी करने के लिए किसी भी एजेंसी ने रुचि नहीं दिखाई।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2007 में नगर निगमों को रिहायशी इलाकों से बंदरों को पकड़ने और उन्हें असोला अभयारण्य में स्थानांतरित करने के लिए कहा था। साथ ही वन विभाग को जानवरों को भोजन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था, जिससे वे बाहर न निकलें। अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान में असोला अभयारण्य में 25 हजार से अधिक बंदर हैं। इसके अलावा रिहयाशी इलाकों में भी बंदर मौजूद हैं, लेकिन इनकी संख्या का हिसाब नहीं है।

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बंदरों के स्थानांतरण के लिए दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त समिति की सदस्य सोन्या घोष के मुताबिक, आखिरी बार कोरोना महामारी से पहले पैनल की बैठक हुई थी। एक अधिकारी के अनुसार, पैनल की अगली बैठक नवंबर के तीसरे सप्ताह में होनी है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बंदरों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए एक गर्भनिरोधक टीका विकसित करने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी एंड वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को मंजूरी दी थी। वन विभाग की ओर से नसबंदी न करने पर  दक्षिण रेंज के उप वन संरक्षक अमित आनंद का कहना है कि विभाग के पास कर्मचारियों की कमी है। इसलिए विभाग की ओर से नसबंदी करना मुश्किल है।
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