कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान को तेजी देने के लिए शीघ्र ही कीर्ति सेना के सात हजार वालंटियर दिल्ली के चुनावी मैदान में उतरेंगे। इन वालंटियर में तीन हजार लोग बिहार से तो बाकी के चार हजार पूर्वी उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों से आयेंगे। दिल्ली की सभी 70 सीटों पर सौ-सौ वालंटियर्स दिन-रात कांग्रेस का प्रचार करेंगे और लोगों को पार्टी की नीतियों से अवगत करायेंगे।
कीर्ति सेना के वालंटियर्स की तैनाती प्रमुख रूप से उन इलाकों में की जाएगी, जहां पूर्वांचली समुदाय के लोग ज्यादा संख्या में रहते हैं। इनका काम पूर्वांचल के लोगों को कांग्रेस पार्टी से जोड़ना होगा। कीर्ति सेना की स्थापना प्रमुख कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद कीर्ति भागवत झा आजाद के समर्थकों ने की है। इसके तीन हजार से ज्यादा सक्रिय सदस्य हैं। इनकी भूमिका पर्दे के पीछे वही होगी, जो आम आदमी पार्टी के लिए प्रशांत किशोर की टीम और भाजपा के लिए आरएसएस की टीम कर रही है।
जानकारी के मुताबिक ये कार्यकर्ता अपने संबंधित इलाकों में ही रात्रि विश्राम भी करेंगे और पूर्वांचली समुदाय के अलग-अलग प्रभावशाली लोगों से मिलकर पार्टी से जुड़ने की अपील करेंगे। इसके लिए शीला दीक्षित सरकार के समय जिन लोगों को पक्के आवास उपलब्ध करवाए गये हैं, उन्हें लोगों के सामने रोल मॉडल की तरह पेश किया जायेगा। पार्टी ने ऐसे लगभग दस हजार परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध करवाए थे। पार्टी इस बार भी सत्ता में आने पर झुग्गी में रह रहे लोगों को पक्के मकान देने का वायदा कर रही है।
कीर्ति आजाद ने अमर उजाला को बताया कि दिल्ली के विकास में पूर्वांचली लोगों का बड़ा योगदान रहा है, लेकिन उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी के बाद भी राजधानी में इस समाज को वह स्थान नहीं मिल सका है, जिसका वह हकदार रहा है। उलटे इस समुदाय को भाजपा और आम आदमी पार्टी समय-समय पर अपमानित करती रही है।
आजाद ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने दिखाने के लिए पहले सतीश उपाध्याय और बाद में मनोज तिवारी को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया, लेकिन टिकट देते समय उसने पूर्वांचलियों को टिकट नहीं दिया। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण तो यह है कि स्वयं बाहर से आये मनोज तिवारी पूर्वांचलियों को 'बाहरी' कहकर उन्हें अपमानित करते हैं।
उन्होंने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे पूर्वांचलियों को यह कहकर अपमानित कर चुके हैं कि वे 500 रुपये का टिकट कटवाकर दिल्ली आ जाते हैं और पांच लाख रुपये का इलाज करवाकर वापस चले जाते हैं।
उन्होंने पूछा कि क्या अब केजरीवाल ही यह तय करेंगे कि दिल्ली में कौन इलाज करवा सकता है और कौन नहीं? क्या यह उनका देश नहीं है? उन्होंने कहा कि उनकी नीति भी भाजपा की तरह पार्टी के कुछ पद पूर्वांचली लोगों को चेहरा दिखाने के लिए दे देने की होती है, लेकिन सच्चाई यह है कि पार्टी में उनकी आवाज नहीं सुनी जाती।