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सुपर स्प्रेडर को तलाशने में नाकाम: वायरस में नए बदलावों पर नहीं है ध्यान, इसीलिए सरकार हो रही हैरान

Fri, 16 Apr 2021 01:05 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राजधानी के डॉक्टरों का कहना है कि सरकार अभी भी पिछले अनुभव के आधार पर कार्य कर रही है लेकिन उनका ध्यान मरीजों की मेडिकल स्थिति पर नहीं है। पिछली बार की तुलना में इस बार वायरस काफी आक्रामक हुआ है।
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कोरोना मरीज (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कोरोना मरीजों के लिए हर दिन सरकार नए-नए आदेश जारी कर रही है। बार-बार अस्पतालों में बिस्तर बढ़ाए जाने के बाद भी थोड़ी-बहुत राहत तक नजर नहीं आ रही है। वहीं नाइट कर्फ्यू की योजना भी अब तक फेल साबित हुई है। यह सब इसलिए क्योंकि कोरोना वायरस में नए बदलावों पर सरकार का ध्यान नहीं है। 

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राजधानी के डॉक्टरों का कहना है कि सरकार अभी भी पिछले अनुभव के आधार पर कार्य कर रही है लेकिन उनका ध्यान मरीजों की मेडिकल स्थिति पर नहीं है। पिछली बार की तुलना में इस बार वायरस काफी आक्रामक हुआ है। दो दिन में ही मरीज की स्थिति गंभीर हो जा रही है। इतना ही नहीं यह काफी तेजी से फैलने की क्षमता भी रखता है। 

दिल्ली एम्स के डॉ. सुमन का कहना है कि दिल्ली में कई तरह के म्यूटेंट वायरस हैं जिनमें काफी तेजी से फैलने की क्षमता है। अभी सामने आ रहे मरीजों की स्थिति पर अधिक अध्ययन भी नहीं हुआ है। अस्पताल में जब मरीज भर्ती होता है तो उसे डॉक्टर पुराने अनुभव और नए ज्ञान के आधार पर उपचार देता है लेकिन एक या दो दिन में ही उसे नई तस्वीर दिखाई देती है। जबकि सरकार की योजना में इस तरह का बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। पहले की तरह बिस्तर बढ़ाए जाने पर जोर दिया जा रहा है। जबकि सुपर स्प्रेडर की जानकारी नहीं है। उन्हें पूरी आशंका है कि कई संक्रमित मरीज सरकारी राडार से बाहर हैं। 
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वहीं डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉ. अमित का कहना है कि दो-दो दिन में संक्रमित मरीज की सांस फूलने लग रही है। जीनोम सिक्वेसिंग का डेटा भी काफी कम है। ऐसे में हम नए म्यूटेशन को लेकर बहुत कुछ अंदाजा नहीं लगा सकते हैं। हालांकि सरकार को जीनोम सिक्वेसिंग को बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। दिल्ली में अभी यूके के साथ साथ पिछले एक साल से रह रहे वायरस में दो से तीन बदलाव भी हुए हैं जिनकी वजह से यह पहले से ज्यादा ताकतवर बन चुका है। इसलिए दिल्ली सरकार को पुराने अनुभव के साथ साथ नए म्यूटेशन को समझना भी बहुत जरूरी है। इनकी तेजी से फैलने की स्थिति यह बता रही है कि दिल्ली में एक मजबूत लॉकडाउन जैसी व्यवस्था जरूरी है। 

वहीं लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के डॉ. माथुर का कहना है कि नाइट कर्फ्यू की सोच पूरी तरह से फेल साबित हुई है। अब तक दिल्ली में ही नाइट कर्फ्यू से एक भी केस कम नहीं हुआ है। दूसरे राज्यों में भी ऐसे ही हालात हैं। इस वक्त सरकार को एक बार फिर से नई रणनीति के साथ काम करने की आवश्यकता है। अन्यथा अस्पतालों में एक क्षमता तक बिस्तर बढ़ाने के बाद फिर कोई रास्ता नहीं बचेगा। 

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