हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों को आर्थिक व अन्य जरूरी सहायता देने व उनके घरों की वापसी के लिए रेल व्यवस्था की मांग वाली याचिका पर केंद्र व दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में पंजीकृत कामगारों को 10 हजार रुपये की वित्तीय सहायता मुहैया कराने की भी मांग की गई है।
मुख्य न्यायाधीश डी.एन. पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने केंद्र व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 13 मई से पहले जवाब देने को कहा है। खंडपीठ ने गैर सरकारी संगठन ‘नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरैडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर’ की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया है।
याची ने दिहाड़ी मजदूरों, प्रवासी कामगारों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों तथा उनके परिवारों का अनिवार्य पंजीकरण और मासिक वित्तीय सहायता देने के लिए सरकार को आदेश देने की मांग की है। इसके अलावा प्रवासी मजदूरों को भोजन और सूखा राशन, पानी, आश्रय, कपड़े, चिकित्सकीय सामग्री आदि देने की भी मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि सरकार दिहाड़ी मजदूरों, प्रवासी कामगारों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को उपयुक्त सुविधा देने में पूरी तरह से विफल रही है। साथ ही कहा है कि तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण और इसके मद्देनजर मौजूदा लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूरों के जीवन पर व्यापक असर पड़ा है।
याचिका में राजधानी छोड़कर जाने वाले कामगारों के साथ भवन व अन्य निर्माण श्रमिक बोर्ड में पंजीकृत कामगारों को 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता मुहैया कराने का आदेश देने की मांग की है।
याची ने कहा कि बढ़ी तादाद में प्रवासी मजदूर व उनके परिवार के सदस्य अपने घरों में लौट रहे है ऐेसे में उनके लिए रेल व बसों का भी इंतजाम करने का निर्देश दिया जाए।
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के अधिवक्ता संतोष त्रिपाठी ने अदालत को बताया कि इसी प्रकार की मांग को लेकर दायर याचिका पर दूसरी खंडपीठ के समक्ष सुनवाई चल रही है ऐसे में इस याचिका को भी वहीं स्थानांतरित किया जाए। खंडपीठ ने कहा कि सरकार के जवाब को देखने के बाद ही इस पर विचार किया जाएगा।