भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच सेहत से खिलवाड़ न करने की सलाह लगातार सुनने को मिलती हैं लेकिन अब ऐसे मामले भी सामने आने लगे हैं जिनकी बिगड़ी जीवनशैली ने अस्पताल तक पहुंचा दिया। एक 28 वर्षीय युवक की हालत इस तरह गंभीर हुई कि एक घंटे तक डॉक्टरों की टीम उसकी छाती दबाती रही और सीपीआर देती रही। तब जाकर कहीं उसकी जान बच पाई है।
यह मामला द्वारका स्थित आकाश अस्पताल का है। डॉक्टरों ने मरीज से बातचीत के आधार पर पता लगाया कि काम का तनाव, धूम्रपान के साथ एल्कोहल के सेवन से युवक का दिल इतना कमजोर हो गया कि अस्पताल पहुंचते पहुंचते उसे हार्ट अटैक आ गया। समय रहते इलाज मिलने से युवक की जान बचा ली गई लेकिन चिकित्सीय जांच में उसकी रक्त कोशिकाओं में ब्लॉकेज मिले।
एक प्राइवेट आईटी कंपनी के कर्मचारी मरीज ने बताया कि उसे सबसे पहले ऑफिस में काम करते करते सीने में दर्द हुआ। पास में ही उसने अपने दोस्त से यह अनुभव साझा किया तो उसने अस्पताल जाने की सलाह दी। ऑफिस से घर जाते वक्त रास्ते में सबसे नजदीक आकाश अस्पताल मिला। यहां वह इमरजेंसी तक पहुंच पाता उससे पहले ही हालत खराब हो गई और उसे हार्ट अटैक आ गया।
डॉक्टरों ने उसे एक घंटे तक दिया सीपीआर
डॉक्टरों ने उसे होश में लाने के लिए एक घंटे तक सीपीआर दिया। जब मरीज होश में आया तो फिर जाकर डॉक्टरों ने एंजियोग्राफी करने के बाद एंजियोप्लास्टि प्रोसिजर पूरा किया। हालांकि अब मरीज स्वस्थ है और उसे छुट्टी दी जा चुकी है।
डॉ शारंग सचदेव ने बताया कि मरीज की आयु कम होने की वजह से दिल की परेशानी के बारे में पता नहीं चला। वहीं डॉ आशीष अग्रवाल ने बताया कि हार्ट अटैक आमतौर पर 50 वर्ष से ज्यादा आयु के लोगों में देखने को मिलता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में हार्ट की बीमारी से पीड़ित युवा मरीजों में वृद्धि हुई है। इस केस में भी मरीज शारीरिक रूप से सक्रिय था और खेल गतिविधियों में भी वह हिस्सा लेता रहा लेकिन फिर भी वह अपने दिल की समस्या से अनजान था।
डॉक्टरों ने बताया कि तंबाकू का सेवन न करने, आहार में नमक की कमी, फलों और सब्जियों के सेवन में वृद्धि, नियमित शारीरिक गतिविधि और शराब से परहेज करने से दिल की बीमारी होने का खतरा कम होता है। यह भी सलाह दी जाती है कि लोग हार्ट अटैक को रोकने के लिए नियमित रूप से जांच करवाएं।