नई दिल्ली। ऐतिहासिक लाल किले को नुकसान पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार दीप सिद्धू को अदालत ने जमानत दे दी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से दर्ज मामले में अदालत ने एक समान अपराध में दीप सिद्धू को दोबारा गिरफ्तार करने के पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह उसे जमानत पर बाहर आने से रोकने का प्रयास था। यह आरोपी के अधिकारों का हनन है।
तीस हजारी अदालत के मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट साहिल गुप्ता ने फैसले में कहा कि आरोपी से पहले ही 14 दिन रिमांड में पूछताछ हो चुकी है। वह करीब 70 दिन से न्यायिक हिरासत में है। जब उसे इसी तरह के एक मामले में सत्र न्यायाधीश ने जमानत प्रदान कर दी है तो उसे जमानत न देना स्वतंत्रता का हनन होगा।
अदालत ने अभियोजन पक्ष के जमानत नहीं देने के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि स्पष्ट है कि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया। उसे 17 अप्रैल की सुबह जमानत पर जेल से रिहा होना था, लेकिन जांच एजेंसी ने उसे तुरंत दूसरे मामले में गिरफ्तार कर लिया, जबकि दोनों मामलों में आरोप एक ही समान हैं। अदालत ने उसकी गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरोपी 9 फरवरी से जेल में है, लेकिन पुलिस ने इस अवधि में कुछ नहीं किया।
अदालत ने कहा कि यह सरासर उसे पहले मामले में मिली जमानत के आधार पर जेल से बाहर आने से रोकने का प्रयास है। यह संविधान में दी गई व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है। अदालत ने इसे जांच अधिकारी की शातिर और भयावह कार्रवाई बताते हुए आपराधिक प्रक्रिया के साथ धोखाधड़ी बताया है। अदालत ने कहा कि सिद्धू को जेल में रखने का कोई आचित्य नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने 25,000 रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और दो अन्य जमानत पर सिद्धू की जमानत मंजूर करर ली। साथ ही, अदालत ने उसे गवाहों को प्रभावित न करने, जांच में सहयोग करने आदि आदेश भी दिए।
इससे पहले, बचाव पक्ष के अधिवक्ता अभिषेक गुप्ता ने तर्क रखा था कि जांच एजेंसी का आचरण प्रथम दृष्टया अवैध और मनमाना था। यह नियम-कानून का सरासर दुरुपयोग था। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को जमानत मिलते ही उसी दिन गिरफ्तारी से स्पष्ट है कि पुलिस बिना कारण उसे जेल में रखना चाहती है।