डीडीए ने अपनी विफल हो चुकी लैंड पूलिंग पॉलिसी को एक बार फिर सिरे चढ़ाने के लिए तैयारी शुरू की है। इस संबंध में उसने सोमवार को किसानों से रूबरू होने का निर्णय लिया है, लेकिन उसने किसानों तक रूबरू होने का संदेश नहीं भेजा है। डीडीए अधिकारियों ने इस संबंध में एक सप्ताह पहले केवल नोटिस जारी किया है। इस कारण कुछ ही किसानों को डीडीए के निर्णय के बारे में मालूम है।
डीडीए की लैंड पूलिंग पॉलिसी में 50 प्रतिशत किसान भी शामिल नहीं हुए है। इस कारण डीडीए की यह पॉलिसी विफल हो चुकी है, लेकिन डीडीए इस पॉलिसी को सिरे चढ़ाने में लगा हुआ है और किसान उसकी इस पॉलिसी में रूचि नहीं ले रहे हैं। इसके बावजूद डीडीए ने किसानों को पॉलिसी से अवगत कराने के लिए सोमवार को उनके साथ ऑनलाइन बैठक करने का निर्णय लिया है।
डीडीए ने अपनी इस बैठक के संबंध में एक सप्ताह पहले नोटिस जारी किया है। डीडीए की लैंड पूलिंग पॉलिसी पर निरंतर नजर रख रहे बढ़ेला निवासी पारस त्यागी ने बताया कि डीडीए की बैठक के बारे में कुछ ही किसानों को मालूम है और ये भी वे किसान है जो लैंड पूलिंग पॉलिसी में शामिल हो चुके है। इस कारण डीडीए की इस बैठक से बहुत कम ही किसानों के जुड़ने की संभावना है।
उधर चौगामा विकास समिति के महासचिव विजेंद्र सिंह ने बताया कि डीडीए ऑनलाइन बैठक कर रहा है, लेकिन अधिकांश किसानों के पास ऑनलाइन बैठक में शामिल होने की व्यवस्था नहीं है। इस तरह डीडीए की किसानों को लैंड पूलिंग पॉलिसी से अवगत कराने की पहल कामयाब होती नहीं दिख रही है, जबकि काजीपुर निवासी सतबीर सिंह कहते है कि डीडीए के अधिकारी अपनी इस पॉलिसी को कार्यालय में बैठकर कामयाब करना चाहते है। इस कारण इस पॉलिसी को कामयाब करने के उनके अभी तक सभी प्रयास विफल रहे है। वहीं झुलझुली निवासी सतपाल का कहना है कि डीडीए ने अपनी इस पॉलिसी से किसानों को अवगत कराने के लिए ग्रामीण इलाके में गोष्ठी आयोजित करनी चाहिए।