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जंतर-मंतर का मौजूदा नजारा: आंदोलन खत्म, फिर भी डटे प्रदर्शनकारी; खाने के लिए लगी कतारें, पढ़िए मौके का हाल

Sat, 25 Jul 2026 11:22 PM IST
Rahul Kumar Tiwari अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

सीजेपी का आंदोलन समाप्त हो चुका है, लेकिन जंतर-मंतर पर अभी भी हलचल बनी हुई है। कई प्रदर्शनकारी अब भी मौके पर डटे हैं, कुछ समर्थक रात बिताने की तैयारी में हैं। मंच हटाने और साफ-सफाई का काम जारी है। आखिर आंदोलन खत्म होने के बाद जंतर-मंतर का क्या है मौजूदा हाल, पढ़िए पूरी खबर।

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जंतर-मंतर का मौजूदा नजारा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन समाप्त होने के बाद भी प्रदर्शन स्थल पर पूरी तरह सन्नाटा नहीं पसरा है। कई समर्थक अब भी जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। शनिवार देर शाम तक मंच हटाने और पूरे इलाके में साफ-सफाई का काम जारी रहा। आंदोलन की सफलता की खुशी में समर्थकों ने केक काटकर जश्न भी मनाया।
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हालांकि, अधिकांश प्रदर्शनकारी अपने-अपने घरों को लौट चुके हैं, लेकिन अभी बड़ी संख्या में समर्थक अभी भी जंतर-मंतर रोड के फुटपाथ पर टेंट लगाकर और गद्दे बिछाकर रात बिताने की तैयारी करते दिखाई दिए। उनका कहना है कि वे रविवार सुबह ट्रेन से अपने गंतव्य के लिए रवाना होंगे।
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प्रदर्शन समाप्त होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिला। प्रदर्शन स्थल से अधिकांश सुरक्षाकर्मी हट चुके हैं, जबकि जंतर-मंतर की ओर आने वाले प्रमुख रास्तों पर एहतियातन पुलिस बल की तैनाती अभी भी बनी हुई है।

उधर, सीजेपी द्वारा आंदोलन वापस लेने के बाद जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवा भी बहाल कर दी गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने भी सभी मेट्रो स्टेशनों पर सामान्य यात्री सेवाएं शुरू कर दी हैं। डीएमआरसी के अनुसार, दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के सभी स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार अब पूरी तरह खुले हैं।
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गौरतलब है कि सरकार से प्रमुख मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद सीजेपी ने आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया। यह आंदोलन एक महीने से अधिक समय तक चला, जिसकी सबसे बड़ी मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल भी की। अंततः धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा देते समय उन्होंने कहा था कि परीक्षा अनियमितताओं के मुद्दे का 'राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा दुरुपयोग न हो, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया।
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