कोविड कॉल में लॉकडाउन के दौरान देशभर के काफी लोगों की नौकरी चली गई। ऐसे में लोगों ने वर्क फ्रॉम होम काम देखना शुरू कर दिया। आरोपियों ने इसका फायदा उठाकर फर्जी वेबसाइट बना ली। नौकरी दिलवाने वाली साइटों से डाटा खरीदकर आरोपी उन युवाओं से संपर्क भी करते थे। इसके अलावा कई बार युवा खुद ही इनकी वेबसाइट पर आ जाते थे।
शुरुआत में पीड़ितों से उनका आधार, पैन कार्ड व अन्य दस्तावेज मांगा जाता था। इसके बाद ऑन लाइन की चोरी से एक एग्रीमेंट साइन कराया जाता था। आरोपी कहते थे सारा काम टारगेट के अनुसार ही करना है। यदि टारगेट पूरा नहीं हुआ तो मामूली फाइन देना होगा। बाद में काम के नाम पर पीड़ित युवाओं का ऐसा टारगेट दिया जाता था कि जो कभी पूरा नहीं होता था। इसके बाद एग्रीमेंट के नाम पर कोर्ट कचहरी का डर दिखाकर युवाओं से अपने खाते में पांच से 10 हजार, 15 से 20 हजार रुपये तक वसूल लिये जाते थे।
फर्जी वकीलों और पुलिस कर्मियों का होता था इस्तेमाल...
यदि कोई आरोपियों को जुर्माने के रुपये देने से इंकार करता था तो आरोपी फर्जी वकील बनकर उनके पास कॉल करते थे। उनको कोर्ट के नोटिस का डर दिखाया जाता था। इसके अलावा पुलिसकर्मी बनकर आरोपी थाने में उनके शिकायत आने की धमकी देते थे। ऐसे में ज्यादातर युवा डरकर आरोपियों के दिए गए खातों में रकम डाल देते थे। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर मामले की जांच कर रही है। जिन लोगों ने आरोपियों को फर्जी पतों पर अकाउंट और सिमकार्ड उपलब्ध करवाए। उनका भी पता लगाया जा रहा है।