नई दिल्ली। अदालत ने दिल्ली कैंट में नौ वर्षीय बच्ची की सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए सभी चारों आरोपियों के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी कर पेश करने का निर्देश दिया है। पुलिस ने हाल ही में मामले में 55 वर्षीय पुजारी राधेश्याम सहित चार लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
पटियाला हाउस कोर्ट स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आशुतोष कुमार ने जेल प्रशासन को आरोपी पुजारी राधेश्याम, कुलदीप सिंह, सलीम अहमद एवं लक्ष्मी नारायण को 29 सितंबर को अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देेश दिया है। अदालत ने आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या, सामूहिक दुष्कर्म संबंधी धाराओं में मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने करीब 400 पृष्ठों का आरोप पत्र दाखिल किया था। पुलिस ने यह आरोप पत्र हत्या, गैर इरादतन हत्या, सामूहिक बलात्कार, गलत तरीके से हिरासत में रखने, सबूतों को नष्ट करने सहित पोक्सो कानून के तहत दाखिल किया है। साथ ही उस पर अनुसूचित जाति जनजाति कानून के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।
इस मामले में चारों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस ने आरोपपत्र में कहा है कि उसके पास पुख्ता सबूत हैं जिसके आधार पर चारों आरोपियों को सजा दिलवाई जा सके। पुलिस ने इस मामले में बच्ची की मां की शिकायत पर एक अगस्त को प्राथमिकी दर्ज की थी। पांच अगस्त को इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंप दी गई थी।
बच्ची की मां ने कहा था कि उसकी नाबालिग बेटी की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई और बिना परिवार की इजाजत के शव को जला दिया गया। इसलिए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
इससे पहले अदालत ने एक आवेदन पर सुनवाई के बाद बेटी के जीवन के नुकसान के लिए बच्ची की मां को 2.5 लाख रुपये की अंतरिम राहत देने का आदेश दिया था। एक सरकारी योजना के अनुसार जीवन के नुकसान के मामले में अधिकतम मुआवजा 10 लाख रुपये है।