अदालत ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कर्मचारियों से मारपीट करने व सरकारी संपत्ति को नुकसान पंहुचाने के आरोप में आप विधायक सामनाथ भारती की दो वर्ष कैद की सजा पर रोक लगा दी। अदालत ने अभियोजन पक्ष को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है। सोमनाथ भारती ने सजा के खिलाफ अपील दाखिल की है।
स्पैशल जज विकास ढुल ने सोमनाथ भारती द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि इस अपील को निपटारे में समय लगेगा ऐसे में वे सजा पर रोक लगाते है। अदालत ने साथ ही भारती को 20 हजार के व्यक्तिगत मुचलके व इतनी ही राशि की एक जमानती पेश करने पर जमानत प्रदान कर दी।
अदालत ने इस मामले में अभियोजन पक्ष को नोटिस जारी कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 15 फरवरी तय की है।
भारती की और से पेश अधिवक्ता मो.इरशाद ने तर्क रखा कि उनका मुवक्किल एक अच्छा नेता है और फोन पर ही शिकायते सुन कर लोगों को राहत प्रदान करता है। उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में राजनीति षडयंत्र के तहत फंसाया गया है। संबंधित जज ने तथ्यों का सही ढंग से आकलन किए बिना ही सजा प्रदान की है।
राऊज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट रविंद्र कुमार पांडे ने 23 जनवरी को भारती को आईपीसी की धारा 323, 353, 143 के तहत व सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने संबंधी धारा तीन के तहत दोषी ठहराते हुए दो वर्ष कैद की सजा के अलावा उन पर कुल राशि एक लाख दो हजार रुपये का जुर्माना किया था।
यह मामला 2016 का है। पेश मामले में आप विधायक सोमनाथ भारती के खिलाफ 9 सितंबर 2016 को एम्स के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने हौजखास थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। सुरक्षा अधिकारी का आरोप था कि भारती अपने करीब 300 समर्थको के साथ घटनास्थल पर पंहुचे और वहां बनी दिवार को तोड़ दिया और हंगामा किया।