दंगों के दौरान आप के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन द्वारा भड़काने पर एक समुदाय के लोग हिंसक हुए थे और दूसरे समुदाय के लोगों पर पथराव शुरू कर दिया था। यह बात अदालत ने दंगों में आईबी कर्मी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुए कही। दिल्ली पुलिस ने अंकित शर्मा की हत्या मामले में 50 पन्नों का आरोप दाखिल किया है। इसमें ताहिर हुसैन समेत दस लोगों को आरोपी बनाया गया है। अन्य आरोपियों में अनस, फिरोज, जावेद, गुलफाम, शोएब आलम, सलमान, नजीम, कासिम और समीर खान शामिल हैं।
कड़कड़डूमा कोर्ट के महानगर दंडाधिकारी पुरुषोत्तम पाठक ने कहा कि दंगे सुनियोजित तरीके से हुए और इसके लिए तैयारी की गई थी। ताहिर हुसैन और अन्य आरोपियों द्वारा कथित तौर पर इसे बढ़ावा दिया गया। ताहिर हुसैन ने उन्हें अपनी इमारत की छत पर जाने की सुविधा दी और अन्य सहायता प्रदान की ताकि बड़े पैमाने पर दंगे हो सकें। दंगा दूसरे समुदाय को जानमाल का नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया।
अदालत ने कहा हुसैन अपने घर से और 24 तथा 25 फरवरी को चांद बाग पुलिया के पास मस्जिद से भी भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे। हुसैन ने कथित रूप से अपने समुदाय को उकसाया और दो समुदायों के बीच धर्म के आधार पर कटुता को बढ़ावा दिया कि एक समुदाय ने उनके लोगों को मार डाला है।
कोर्ट के समक्ष जांच अधिकारी ने कहा कि पार्षद ताहिर हुसैन और अन्य पर राजद्रोह की धाराओं में मुकदमा चलाने की अनुमति संबंधित सक्षम अधिकारी से अभी नहीं मिली है। अदालत ने इस पर कहा कि मंजूरी प्राप्त करने में देरी से वह मकसद पूरा नहीं होगा जिसके लिए विशेष अदालतें बनाई गई हैं।
कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी के अनुसार मौजूदा मामले में 22 जून को सक्षम प्राधिकार के पास एक पत्र भेजा गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि मंजूरी मिलने में कितना समय लगेगा। ऐसे में अदालत अन्य सभी अपराधों का संज्ञान लेना उचित समझती है।
अदालत ने आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुए कहा कि आरोपियों द्वारा किए गए अपराधों का संज्ञान लेने के लिए रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री है। अदालत ने मामले में सुनवाई के लिए 28 अगस्त की तारीख तय करते हुए सभी आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश करने का निर्देश दिया।