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नजफगढ़ फायरिंग मामला: अदालत ने दिल्ली पुलिस को लगाई फटकार, बयानों में कुछ ऐसा है विरोधाभास

Mon, 22 Nov 2021 05:51 PM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

अदालत ने कहा आरोपी के अधिवक्ता के अनुसार रोहित के पिता को उसके डीडीयू अस्पताल में होने का पता चला और उससे मिलने के लिए कई प्रयास किए। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने उसे अपने पुत्र से मिलने नहीं दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान आरोपी से पूछा कि पुलिस अधिकारियों ने उसे किन परिस्थितियों में हिरासत में लिया।
 
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कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।) - फोटो : iStock
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विस्तार
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अदालत ने नजफगढ़ में फायरिंग के मामले में रोहित गहलोत नाम के एक शख्स की गिरफ्तारी के मामले में दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि द्वारका पुलिस और उसके वकील के बयानों में विरोधाभासों को देखते हुए स्पष्ट है कि उसकी गिरफ्तारी से संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया है। मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विनोद कुमार मीणा ने संबंधित डीसीपी (द्वारका) को रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है कि गहलोत को कब हिरासत में लिया गया और क्या उनके परिवार को सूचित करने जैसी अन्य कानूनी आवश्यकताएं पूरी हुईं। आरोपी के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ अशोक मित्तल ने नजफगढ़ थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। पुलिस ने एक नवंबर को उनके मुवक्किल को पूछताछ के लिए उठाया था।

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उन्होंने कहा पुलिस अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि उनके मुवक्किल को कहां ले जाया गया। उनके मुवक्किल के परिवार को 8 नवंबर को पता चला कि उसे गिरफ्तार किया गया है और इस संबंध में मीडिया से 3 नवंबर को खबर प्रकाशित हुई। यह खबर डीसीपी द्वारका के हवाले से प्रकाशित हुई थी।

आरोपी ने अदालत को बताया कि उसे चार पुलिस अधिकारियों 1 नवंबर को दोपहर 1.45 बजे उसके घर से इस बहाने ले गए कि उसे डीसीपी ने बुलाया है। आरोपी ने यह भी आरोप लगाया कि उसे पुलिस ने गोली मारी और वह 11 नवंबर तक अस्पताल में था। वहीं सरकारी वकील ने इस तथ्य को गलत बताते हुए कहा कि वर्तमान मामले में आरोपी रोहित को 13 नवंबर को ही गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि पुलिस ने तय नियमों का पालन किया है और आरोपी पहले ही एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में था और नवंबर को इस मामले में औपचारिक गिरफ्तारी हुई थी।
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अदालत ने बचाव पक्ष के वकील की दलीलें सुनने और एसएचओ द्वारा दाखिल जवाब पर गौर करने के बाद कहा कि जांच एजेंसी, डीसीपी और आरोपी के बयानों में कुछ स्पष्ट विरोधाभास हैं। एसएचओ के जवाब में यह उल्लेख किया गया है कि आरोपी को 13 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था जबकि प्रिंट मीडिया में 3 नवंबर को डीसीपी द्वारका के माध्यम से यह बताया गया था कि आरोपी को 2 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने कहा डीसीपी ने अपने बयान में कहा है कि आरोपी को दो नवंबर को मित्तल स्वीट शॉप पर दो लोगों से पूछताछ के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। ऐसे में स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।

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