नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने द्वारका स्थित 1,241 बेड वाले इंदिरा गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को कोरोना अस्पताल घोषित किए जाने के बाद वहां सुपर स्पेशलिटी सुविधा नहीं दिए जाने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि ऐसा नहीं है कि कोरोना मरीजों के इलाज के दौरान उन्हें दूसरी बीमारी की इलाज की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐसे में दिल्ली सरकार वहां सुपर स्पेशलिटी की भी व्यवस्था करें।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि यह सुविधा कब तक उपलब्ध हो जाएगी। अदालत ने सरकार को इस संबंध में कार्य योजना पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 2 अगस्त के लिए स्थगित कर दी।
पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि वर्तमान में एक बार सुपर स्पेशलिटी की व्यवस्था रोक दी जाती है तो पता नहीं फिर कब तक पूरी होगी। अदालत ने कहा पता नहीं कोरोना की तीसरी लहर कब आ जाए और किस तरह आए। इसीलिए अस्पताल को बेहतर बनाया जाना जरूरी है और वहां सुपर स्पेशलिटी की भी व्यवस्था होनी आवश्यक है।
दिल्ली सरकार की तरफ से पेश अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि वहां मूलभूत सुविधा तैयार की जा चुकी है और ऑक्सीजन की व्यवस्था की जानी है। ऑक्सीजन की व्यवस्था होते ही अस्पताल को चालू कर दिया जाएगा।
पीठ द्वारका बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची ने तर्क रखा है कि इस अस्पताल को वर्ष 2019 में तैयार होना था लेकिन दो वर्ष से ज्यादा समय होने के बावजूद इसे शुरू नहीं किया गया। इस इलाके में ऐसा कोई भी बड़ा अस्पताल नहीं है और इसके बनने से इलाके के लोगों को चिकित्सा पाने में सहायता मिलेगी।