कोरोना से जंग जीतकर फिर से मरीजों की सेवा में
डॉ. दीक्षा, सिविल अस्पताल, जोगिंद्रनगर, मंडी
कोरोना से जंग जीतकर डॉ. दीक्षा ने सिविल अस्पताल जोगिंद्रनगर में फिर से कार्यभार संभाल लिया है और मरीजों की सेवा में जुट गई हैं। दो सप्ताह पहले वह संक्रमित हो गईं थीं। मरीजों की सेवा के लिए युवा महिला चिकित्सक फिर से कोरोना के खिलाफ जंग में उतर आईं हैं।
सोमवार को ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद बिना किसी खौफ से अस्पताल की आपात सेवाओं में भी सेवाएं देने वाली डॉ. दीक्षा बताती हैं कि 29 अप्रैल को जब वह अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं में तैनात थीं तभी एक कोरोना संक्रमित के उपचार के दौरान संक्रमण की चपेट में आ र्गइं थीं। करीब दो सप्ताह तक होम आइसोलेट रहने के बाद जब खुद को पूरी तरह से स्वस्थ पाया तो अस्पताल में फिर से संक्रमितों की सेवा का जिम्मा उठा लिया।
दीक्षा के पिता सुशील ठाकुर नाहन जेल के अधीक्षक हैं। माता गृहिणी हैं, जिन्होंने अपनी बेटी को दोबारा संक्रमित मरीजों की सेवा के लिए अस्पताल में भेजा है। डॉ. दीक्षा अस्पताल की वैक्सीनेशन टीकाकरण की भी प्रभारी हैं। सोमवार को अस्पताल की ओपीडी में भी उन्होंने मरीजों का भी स्वास्थ्य जांचा और संक्रमित मरीजों को उपचार दिलाने का भी कार्य बखूबी निभाया। कहा कि संकट के समय में सभी को एक-दूसरे के काम आना चाहिए।
महामारी को हराने के लिए उतरे मददगार
विवेक पांडेय, संस्था गांधीगीरी टीम, आजमगढ़
कोरोना महामारी के बीच जहां लोग अस्पतालों में सिलेंडर, बेड और दवाओं के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। वहीं, कुछ ऐसे लोग भी हैं जो मददगार बनकर जरूरतमंद को सहारा दे रहे हैं। संकट के इस दौर में ऐसे लोग दूसरों को भी सेवा करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ऐसा ही एक सामाजिक संगठन है गांधीगीरी टीम जो लोगों की मदद कर रहा है। इस टीम में शामिल युवा कोरोना संक्रमित मरीजों को दवा की किट, ऑक्सीजन उपलब्ध करा रहे हैं। इतना ही नहीं जरूरत पड़ने पर अस्पतालों में भी भर्ती करा रहे हैं।
शहर के समीप स्थित सुंभी गांव निवासी विवेक पांडेय ने परिवर्तन सेवा संस्थान के नाम से एक टीम बनाकर जल संरक्षण को लेकर मुहिम चलाई थी। ताकि आने वाले कल में जल की कमी न हो। कोरोना के बढ़ते संक्रमण से इस अभियान पर विराम लग गया। लोग अपने घरों में कैद हो गए, लेकिन परिवर्तन सेवा संस्थान की टीम ने अपना रूप परिवर्तित कर गांधीगीरी टीम बनाई और लोगों की मदद को निकल पड़ी। ताकि कोई भी गरीब उपचार के अभाव में जान न गंवाए। सूचना मिलते ही टीम के सदस्य मदद में जुट जाते हैं। यदि परिवार के पास पैसे नहीं हैं तो टीम पैसा एकत्रित कर उपचार कराती है। यहां तक की जरूरतमंद लोगों को आक्सीजन भी उपलब्ध करा रही है।
व्हाट्सएप पर चल रहा ग्रुप
टीम के सदस्यों ने एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया है। इसमें सदस्यों के साथ-साथ क्षेत्र के लोग भी जुड़े हैं। यदि कोई व्हाट्सएप पर मदद मांगता है तो टीम उसकी मदद के लिए जुट जाती है। टीम की मदद से अब तक दर्जनों लोगों की जान बचाई जा सकी है। टीम ने लखनऊ व वाराणसी में भी मरीजों को भर्ती कराया है।
संक्रमित होने के बाद भी दिखाया जज्बा
डॉ. एपीएस बत्रा, निदेशक, राजकीय मेडिकल कॉलेज, गोहाना, हरियाणा
खानपुर कलां स्थित बीपीएस मेडिकल कॉलेज के निदेशक ने संक्रमित होने के बाद भी गजब का जज्बा दिखाया। उन्होंने पहले होम आइसोलेशन और फिर आईसीयू में रहकर भी ड्यूटी की। होम आइसोलेशन में उन्होंने नौ दिन में 500 से अधिक फाइलें पास कीं और फिर पांच दिन आईसीयू में रहते हुए संक्रमित चिकित्सक की जिंदगी बचाने के साथ ही अन्य मरीजों की निगरानी की। कोरोना से जंग जीतकर फिर से सामान्य दिनों की तरह काम किया।