हाईकोर्ट ने विदेशी फार्मा कंपनियों द्वारा उनके कोरोना टीकों के भारत में आपात इस्तेमाल की अनुमति के लिए किए गए आवेदनों के विवरण और स्थिति की जानकारी की मांग कों लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने बिना आधार के याचिका दायर करने पर याचिकाकर्ता पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता मयंक वाधवा के ज्ञान को बढ़ाने के लिए याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं था। पीठ ने कहा कि हम आपका ज्ञान बढ़ाने के लिए आपकी याचिका पर विचार नहीं करने जा रहे हैं। पीठ ने कहा कि याचिका में जो मांग की गई है, उसके लिए याचिकाकर्ता सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत एक आवेदन कर सकते थे।
पीठ ने कहा कि इस तरह की मांग को लेकर जनहित या रिट याचिका दाखिल करना उचित उपाय नहीं है। पीठ ने कहा कि न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का जनता द्वारा दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि दिल्ली में एक फैशन बन गया है कि किसी को भी कोई आईडिया आता है तो याचिका दायर कर दो। अदालत ने कहा हर समस्या का हल याचिका नहीं है।
अदालत ने एक अन्य याचिका में उठाए गए टीकों की बॉटलिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह आरो का पानी नहीं, टीका है।’ पीठ ने कहा कि टीके का बॉटलिंग एक तकनीकी पहलू है जिस पर विशेषज्ञों को विचार करना चाहिए। पीठ ने कहा कि ऐसे में इस मांग को सुनवाई के लिए स्वीकर कर नहीं कर रहे हैं। हालांकि पीठ ने केंद्र सरकार व संबंधित प्राधिकार को याचिका को बतौर प्रतिवेदन स्वीकार करने और इसमें उठाए गए मसलों पर अपने नीति, नियमों के तहत विचार करके सुमचित निर्णय लेने को कहा है।