राष्ट्रीय स्तर पर दान में मिलीं कॉर्निया का प्रत्यारोपण में प्रयोग दर 70 फीसदी रही जो दिल्ली एम्स की तुलना में करीब नौ फीसदी कम है। साल 2019 में 2055 कॉर्निया दान में मिले थे लेकिन साल 2020 में केवल 394 कॉर्निया ही दान में मिल सके।
डॉ. तितियाल ने बताया कि दो साल पहले एम्स में कॉर्निया प्रत्यारोपण की वेटिंग सूची काफी लंबी थी लेकिन महामारी के चलते काफी कुछ असर देखने को मिला है। इसलिए एम्स ने फिर से नई सूची बनाना शुरू कर दिया है। हालांकि पुराने मरीज अगर अभी भी वेटिंग में है तो उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
एम्स के मुताबिक कोरोना महामारी से पहले अप्रैल 2019 से मार्च 2020 के बीच 79.90 फीसदी नेत्रदान में कमी आई है। वहीं 78.20 फीसदी कमी इनके प्रयोग दर में मिली है। यह गंभीर प्रभाव है और अब इससे बाहर आने की कोशिश की जा रही है लेकिन एम्स के पास फिलहाल न सिर्फ पुराने मरीज बल्कि नए मरीज भी काफी संख्या में सामने आ रहे हैं। स्थिति यह है कि दूसरी लहर के बाद से अब तक तीन से चार गुना अधिक मरीज पंजीयन करा चुके हैं।
सालाना एक लाख से अधिक ऑपरेशन का लक्ष्य
डॉक्टरों के अनुसार सालाना एक लाख से अधिक मरीजों के जीवन में वापस से रोशनी लाने के लिए वर्षों से काम किया जा रहा था लेकिन महामारी के बाद अचानक से सभी प्रयास विफल हो गए। बीते 56 साल में राष्ट्रीय नेत्र बैंक (एनईबी) की वजह से 32 हजार से भी अधिक कॉर्निया दान में मिल चुके हैं जिनमें से 22500 से भी ज्यादा कॉर्निया प्रत्यारोपित किए जा चुके हैं।
साल 2019 में राष्ट्रीय अंधापन और दृश्य हानि सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 50 साल से कम आयु में कॉर्निया से जुड़ी बीमारियां अंधापन का मुख्य कारण रही हैं। इनकी वजह से 37.5 फीसदी मामले मिल चुके हैं। जबकि 50 वर्ष से अधिक आयु में ऐसे मामले 8.20 फीसदी ही दर्ज किए जा चुके हैं। भारत में करीब 68 लाख से अधिक लोग अंधापन के शिकार हो सकते हैं।
फंगस की वजह से हुआ काफी नुकसान
डॉक्टरों ने बताया कि महामारी के दौरान फंगस के मामले पिछले साल और इस बार देखने को मिले हैं। साल 2020 में 16 मरीजों की आंखें तक निकालनी पड़ गई थीं और उस दौरान स्टेरॉयड की भूमिका नहीं थी लेकिन दूसरी लहर के बाद काफी मरीज भर्ती हुए हैं जिनमें स्टेरॉयड के अलावा अनियंत्रित मधुमेह भी मुख्य कारण रही। करीब छह से सात मरीजों की सर्जरी करके आंखें तक निकालनी पड़ गईं। फंगस की वजह से अंधापन हो सकता है लेकिन कोरोना महामारी की वजह से अंधापन होने की पुष्टि नहीं हो सकी है।
उपराष्ट्रपति ने भी नेत्रदान की अपील की
एम्स के आरपी सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने भी लोगों से नेत्रदान करने की अपील की है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी के जीवन में रोशनी लाने से बड़ी सहायता कुछ और नहीं हो सकती। यही सबसे बड़ी मानवता भी है। महामारी से पूरा देश मिलकर मुकाबला कर रहा है। हम सभी के लिए कोविड-19 सर्तकता नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है लेकिन उसके साथ साथ औरों का जीवन बचाना भी आवश्यक है।
ऐसे पड़ा महामारी का असर
| साल |
दान में मिले कॉर्निया |
प्रत्यारोपण |
कॉर्निया प्रयोग दर (फीसदी में) |
| 2018 |
2234 |
1426 |
63.83 |
| 2019 |
2055 |
1721 |
83.74 |
| 2020 |
394 |
311 |
78.9 |