केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं की परीक्षाएं स्थगित की जा चुकी है। कोरोना की स्थिति को देखते हुए बोर्ड एक जून के बाद स्थिति की समीक्षा करेगा। ऐसे में परीक्षाएं आयोजित करने को लेकर असमंजस बना हुआ है। हर किसी का एक सवाल है कि यदि परीक्षाएं हुईं तो क्या वह ऑफलाइन होंगी या ऑनलाइन। सीबीएसई इस पर अभी कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है।
डीयू दाखिला प्रक्रिया से लंबे समय से जुड़े रहे डॉ गुरप्रीत सिंह टुटेजा कहते हैं कि भारत में 12वीं की ऑनलाइन परीक्षाएं संभव नहीं हैं। संसाधनों की कमी और परीक्षार्थियों की संख्या काफी अधिक है। लिहाजा बोर्ड के पास ऑफलाइन परीक्षा कराने का ही विकल्प है। वहीं, स्ट्रीम (साइंस, आर्ट, कॉमर्स) के हिसाब से तीन-तीन मुख्य विषय में एक भाषा की परीक्षा कराए जाने का विकल्प भी है। बाकी विषयों के लिए आंतरिक मूल्यांकन किया जा सकता है।
मौसम विहार स्थित डीएवी स्कूल की प्रिंसिपल वंदना कपूर कहती हैं कि देर से ही सही लेकिन बोर्ड को ऑफलाइन परीक्षा ही आयोजित करनी चाहिए। ऑनलाइन परीक्षा नहीं कराई जा सकती। इससे ना केवल उनके सही प्रदर्शन का नहीं पता चलेगा बल्कि नकल करने की भी गुंजाइश रहेगी। ऑफलाइन परीक्षा से ही विद्यार्थी की सही क्षमता का पता चल सकेगा।
वह कहती हैं बारहवीं की परीक्षा विद्यार्थी की उच्च शिक्षा भी जुड़ी होती है। कोई फॉर्मूला लगाकर भी उसे प्रमोट नहीं किया जा सकता। देश या विदेश में कोई भी विश्वविद्यालय इसे दाखिले का आधार नहीं मानेगा।
वहीं डॉ. टुटेजा का मानना है कि किसी भी परीक्षा का एक मौलिक सिद्धांत होता है कि परीक्षा कराने का एक ही तरीका हो। कुछ ऑफलाइन दें कुछ ऑनलाइन यह संभव नहीं है। लिहाजा ऑफलाइन परीक्षा होनी चाहिए। 12वीं में कई विद्यार्थी ऐसी पारिवारिक पृष्ठभूमि के होते हैं जिनके पास लैपटॉप की व्यवस्था नहीं होती। फोन के माध्यम से ऑनलाइन परीक्षा देना संभव नहीं। वह कहते हैं कि ऑनलाइन परीक्षा कराने के लिए तकनीक तो है लेकिन संसाधनों की कमी और विद्यार्थियों की संख्या (14 लाख) होने के कारण इसे आयोजित करना कठिन होगा।