फूल वालों की सैर को मिली सशर्त मंजूरी
-उपराज्यपाल के दखल के बाद डीडीए ने भरी हामी, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बगैर आयोजित किया जाना है उत्सव
नई दिल्ली। उपराज्यपाल वीके सक्सेना के दखल के बाद दिल्ली की मशहूर फूल वालों की सैर के आयोजन को इजाजत मिल गई है। डीडीए ने आयोजक संस्था अंजुमन-सैर-ए-गुल फरोशां से कहा है कि वह इस उत्सव को पर्यावरण का नुकसान पहुंचाए बिना आयोजित करे। इससे पर्यावरणीय संतुलन के साथ दिल्ली की सांस्कृतिक धरोहर दोनों का संरक्षण हो सकेगा।
इससे पहले पिछली सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग ने 28 नवंबर 2023 के एक आदेश से दक्षिणी रिज क्षेत्र में ऐसे किसी भी त्योहार या आयोजन की अनुमति रोक दी गई थी। उसी वक्त से इस आयोजन की फाइल लंबित पड़ी हुई थी। अधिकारी बताते हैं कि बीते दिनों मामला सामने आने के बाद एलजी ने गंभीर रुख अपनाते हुए अधिकारियों की उदासीनता और जनसमस्याओं के प्रति लापरवाह रवैये पर नाराजगी जताई। एलजी ने निर्देश दिया है कि इस मामले में लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और स्पष्ट किया कि जनहित के विरुद्ध कार्य करने वालों को दंडित किया जाएगा।
बता दें कि यह ऐतिहासिक उत्सव दो नवंबर को होना तय था, लेकिन विभागीय अनुमति न मिलने से इसे स्थगित करना पड़ा था। नए सिरे से आयोजन को मंजूरी मिलने के बाद अब बताया जा रहा है कि इसकी तैयारी पूरी करने में दो से तीन महीने का वक्त लगता सकता है। ऐसे में फूल वालों की सैर फरवरी या मार्च में हो सकती है।
एतिहासिक है दिल्ली में फूल वालों की सैर
राजधानी दिल्ली की गंगा-जामुनी तहजीब के प्रतीक के तौर पर फूल वालों की सैर का आयोजन होता है। इसकी शुरुआत 1812 में पड़ी थी। यह आयोजन 1942 तक लगातार चलता रहा। इसके बाद ब्रिटिश शासन ने इसे रोक दिया। आजादी मिलने के बाद यह फिर से 1962 में शुरू हुआ। केंद्र सरकार की मदद से इसे पुनर्जीवित किया गया और तब से हर साल जहाज महल के निकट पार्क में यह परंपरा कायम है। इसमें हिंदू और मुस्लिम समुदाय मिलकर भाग लेते हैं। इसका आयोजन रिज क्षेत्र में होता है। एक सप्ताह तक चलने वाले इस आयोजन में दोनों समुदायों की तरफ से निकाली जाने संयुक्त यात्राओं के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं।