नई दिल्ली। आर्थिक अपराध शाखा ने बैंक में गिरवी प्रॉपर्टी को बेचकर दस करोड़ की ठगी करने के आरोप में श्री कॉलोनाइजर्स एंड डेवलपर्स प्रा. लिमिटेड के सीएमडी और उसके दो निदेशकों को सोमवार को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने गलत जानकारी देकर होटल और आवासीय कॉलोनी के लिए प्रॉपर्टी बेच दी थी। बाद में पता चला कि उस प्रॉपर्टी को गिरवी रखकर आरोपियों ने सिंडिकेट बैंक से 15 करोड़ का लोन ले रखा है। बैंक ने एनपीए घोषित करने के बाद प्रॉपर्टी को अपने कब्जे में ले लिया था। तीनों आरोपियों को नोटिस देकर बुलाया गया था, जिसके बाद गिरफ्तार किया।
शाखा के पुलिस उपायुक्त राजीव रंजन ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लखनऊ के अलीगंज की चंद्रलोक कॉलोनी निवासी मनोज द्विवेदी, लखनऊ के कैसर बाग निवासी ऋषि अरोड़ा और लखनऊ के अमानीगंज निवासी उमेश आजाद के रूप में हुई है। मनोज द्विवेदी श्री कॉलोनाइजर्स एंड डेवलपर्स प्रा. लिमिटेड कंपनी के सीएमडी हैं, जबकि अन्य दो कंपनी के निदेशक हैं। वर्ष 2018 में वीआरके कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विनोद कुमार राजपाल ने शाखा में कॉलोनाइजर्स एंड डेवलपर्स प्रा. लिमिटेड व उसके निदेशकों के खिलाफ ठगी की शिकायत की थी। उसने बताया कि कंपनी ने होटल और आवासीय कॉलोनी के लिए लखनऊ के सुल्तानपुर रोड पर सुशांत गोल्फ सिटी के इंटरनेशनल बिजनेस बे-2 में स्थित प्रॉपर्टी को दस करोड़ रुपये में बेचा।
बाद में शिकायतकर्ता कंपनी को पता चला कि उक्त प्रॉपर्टी को आरोपी कंपनी व उसके निदेशकों ने सिंडिकेट बैंक में गिरवी रखकर 15 करोड़ रुपये लोन लिया था। लोन नहीं चुका पाने पर बैंक ने उक्त प्रॉपर्टी पर कब्जा कर लिया था। इस जानकारी के बाद शाखा में शिकायत की गई।
जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने प्रॉपर्टी को बेचने के दौरान पीड़ित को बताया था कि प्रॉपर्टी सभी भारों से मुक्त है। गलत जानकारी देकर उन्होंने शिकायतकर्ता कंपनी से दस करोड़ रुपये ठग लिए। ठगी में संलिप्तता का खुलासा होने के बाद एसआई विक्रम सिंह के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने 22 नवंबर को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।