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व्हाट्सएप ग्रुप से ठगी का शिकार होने से बचा कर्नल का अर्दली

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नई दिल्ली। व्हाट्सएप ग्रुप व दक्षिण-पूर्व जिले के पुलिसकर्मियों की फुर्ती की वजह से सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल का अर्दली (सेना का सिपाही) ठगी का शिकार होने से बच गया। जालसाजों ने उसके खाते से पैसे तो ट्रांसफर कर लिए थे, मगर पुलिसकर्मियों ने पैसों को जालसाजों के खाते में जाने से पहले ही रुकवा दिया।
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दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार सेना में सिपाही के पद पर तैनात गौरव यादव दिल्ली में एक लेफ्टिनेंट कर्नल के यहां तैनात था। उसकी 30 नवंबर को तनख्वाह आई थी। अगले दिन वह अपने फोन को रिचार्ज करवा रहा था। फोन रिचार्ज नहीं हो रहा था तो गौरव यादव ने कस्टमर केयर से रिचार्ज करवाने के लिए नंबर लिया। गौरव ने उस नंबर पर फोन किया तो उसे क्यूआर कोड को स्कैन करने के लिए कहा गया। गौरव से क्यूआर कोड को दो बार स्कैन करवा लिया गया। स्कैन करते ही उसके खाते से 1998 रुपये कट गए। इसके बाद कस्टमर केयर वाले ने गौरव यादव से ओटीपी पूछा। गौरव ने ओटीपी बता दिया। ओटीपी बताते ही गौरव की पूरी सैलरी करीब 50 हजार रुपये उसके खाते से निकल गए।
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व्हाट्सएप ग्रुप में जानकारी शेयर की गई-
कर्नल ने इसकी जानकारी जिले साइबर सेल प्रभारी संदीप पंवार को दी। संदीप पंवार ने ये जानकारी स्टॉप बैंकिंग फ्रॉड गु्रप में साझा की। टेलीग्राम पर ये ग्रुप बना हुआ है। इस ग्रुप में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल के पुलिस अधिकारी, अन्य राज्यों के पुलिस अधिकारी व फ्लिप कार्ड जैसी ऑनलाइन पैसे का लेन-देन करने वाली कंपनियों के अधिकारी जुड़े हुए हैं। ग्रुप पर यह जानकारी देखकर फ्लिपकार्ड के अधिकारी ने बताया कि जालसाजों ने पैसे फ्लिपकार्ड में ट्रांसफर किए है। इंस्पेक्टर संदीप पंवार के आग्रह पर उन्होंने फ्लिपकार्ड में पैसे रुकवा दिए।
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