दिल्ली जलबोर्ड ने राजधानी को झीलों का शहर बनाने की कवायद तेज की है। जलबोर्ड ने दक्षिण दिल्ली स्थित संजय वन झील की सफाई की है और पानी की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए फ्लोटिंग राफ्टर्स तैनात किए हैं। इससे न केवल झील का सौंदर्यीकरण होगा, बल्कि भूजल स्तर में भी सुधार होगा। अभी इस झील को पुनर्जीवित करने का पहला चरण पूरा हुआ है।
यह झील दिल्ली विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आती है, लेकिन दिल्ली जलबोर्ड झीलों के शहर परियोजना के तहत इसका कायाकल्प कर रहा है। दरअसल, जलबोर्ड का इस वर्ष के अंत तक 50 स्थलों पर पानी की गुणवत्ता को पुनर्जीवित करने और उसमें उल्लेखनीय सुधार करने का लक्ष्य है। यह अधिकतर स्थल उसके अधीन नहीं है।
जलबोर्ड ने संजय वन झील के पानी से अतिरिक्त प्रदूषकों को निकालने के लिए हार्मोनल रूप से उपचारित पौधों को रखने वाले फ्लोटिंग राफ्टर्स का सहारा लिया है। ये ऐसे पौधे होते हैं जो पानी के प्रदूषण को सोख लेते हैं। यह आर्टिफिशियल फ्लोटिंग वेटलैंड हरे पैचेज के रूप में पानी की सतह पर तैरते रहते हैं। यह प्रदूषण को सोखने की क्षमता रखते हैं और जल व वायु प्रदूषण कम करते हैं। ये बड़े पेड़-पौधे की तरह हवा में घुले प्रदूषक तत्वों को सोखते हैं।
फ्लोटिंग वेटलैंड के पौधे अपना पोषण झील से लेते हैं। इस कारण झील के पानी की गुणवत्ता सुधरती है। उसकी दुर्गंध कम हो जाती है। ये पौधे नाइट्रेट और फास्फेट को बायोमास में बदल देते हैं। इनकी जड़ें फिल्टर की काम करती हैं। फ्लोटिंग वेटलैंड पक्षियों और मछलियों के लिए आशियाना भी साबित होते है, इनमें पक्षी अंडे देते हैं।
जलबोर्ड के अनुसार, संजय वन झील की तरह जाफरपुर कलां, नांगलोई, रजोकरी और सोनिया विहार के जलाशयों के पानी को भी साफ किया जाएगा। रानी खेड़ा गांव में एक झील को विकसित किया जा रहा है।