नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने सरकारी स्कूलों के दसवीं व बारहवीं के बच्चों की बेहतर परीक्षा तैयारी के लिए कमर कस ली है। बोर्ड की परीक्षाएं चार मई से शुरू होनी है। बीते दस माह से बंद स्कूल 18 जनवरी को ही खोले गए हैं। अब स्कूलों में बच्चों को कम समय में क्या और कैसे पढ़ना है, यह सिखाया जा रहा है।
शिक्षकों को पूरे पाठ्यक्रम को रिवाइज करने की बजाय महत्वपूर्ण टॉपिक पर फोकस करने के लिए कहा गया है। सरकारी स्कूलों का रिजल्ट खराब ना हो इसके लिए शिक्षा निदेशक भी प्रत्येक जिले में स्कूल प्रमुखों के साथ परीक्षा तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। बीते कुछ सालों से सरकारी स्कूलों के रिजल्ट में काफी सुधार हो रहा है। ऐसे में सरकार नहीं चाहती कि किसी भी कारण से सरकारी स्कूलों का रिजल्ट खराब हो।
स्कूलों को कहा गया है कि वह बच्चों को विषयवार सैंपल पेपर उपलब्ध कराएं, जिससे वह बेहतर तरीके से प्रैक्टिस कर सकें। बच्चों को किसी टॉपिक में जो कमी लग रही है उसकी पहचान कर उसे सुधारा जाए। कोरोना के कारण लंबे समय तक बच्चे घर पर रहे हैं, ऐसे में उनमें तनाव होना स्वाभाविक है। ऑनलाइन कक्षाएं तो लगातार हुई हैं लेकिन कई बच्चों ने इस सुविधा का लाभ नहीं लिया है। अब चूंकि परीक्षा के लिए बच्चों को तैयार करने के लिए स्कूल खोले गए हैं ऐसे में उन्हें तनाव से बाहर निकालकर बेहतर तैयारी कराया जाना जरूरी है।
स्कूलों को कहा गया है कि बच्चों का सारा पाठ्यक्रम रिवाइज कराने की बजाय उन टॉपिक पर फोकस करें जो कि परीक्षा के हिसाब से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। सीबीएसई ने कोर्स कम करने के साथ प्रश्न पत्र के डिजाइन में भी संशोधन किया है, इस नए डिजाइन के संबंध में भी कक्षा में चर्चा की जाए।
स्कूलों के सामने बड़ी चुनौती यह है कि अब भी स्कूलों में कम बच्चे आ रहे हैं। इतने लंबे समय बाद स्कूल आने के कारण उनकी पढ़ाई की आदत भी नहीं रही है। ऐसे में स्कूल भी ऐसी तकनीक का सहारा ले रहे हैं जिससे आसानी से पाठ्यक्रम का अभ्यास कराया जा सके। इसके लिए उन्हें नए सिरे से कम पाठ्यक्रम के साथ पढ़ाया जा रहा है।