लाखों श्रद्धालुओं ने यमुना नदी के किनारे पुराना यमुना पुल, कुदसिया घाट, गीता कालोनी, बस अड्डा, चंदगी राम अखाड़ा, वजीराबाद घाट आदि घाटों के अलावा भलस्वा झील, जहांगीरपुरी, कालिंदी कुंज, नरेला, उत्तम नगर, डाबड़ी, ककरौला, बदरपुर, सरिता विहार, आश्रम, जैतपुर, संगम विहार, देवली, महरौली, पालम, महावीर एंकलेव, इंद्रप्रस्थ एक्सटेंशन, नांगलोई, सुलतानपुरी, मंगोलपुरी, नजफगढ़ आदि इलाकों के साथ-साथ पश्चिम यमुना नदी के किनारे पर छठ पूजा की, वहीं वे सायंकाल सूर्य को अर्घ्य देने के बाद बृहस्पतिवार की सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर रूक गए। वह घाटों पर पूरी रात रहेंगे, घाटों पर दीप व बिजली की लड़ियों की रोशनी की गई है।
कोरोना महामारी के कारण इस बार श्रद्धालु घाटों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों को आयोजन नहीं कर सके। इसके अलावा वे लाउड स्पीकर के माध्यम से भी छठ मैय्या का गुणगान नहीं कर सके। हालांकि श्रद्धालु नए कपड़े पहनने के साथ-साथ पूरी तरह सजधज कर पूर्जा करने पहुंचे।
छठ पूजा के दौरान कई रंग दिखाई दिए
कोरोना महामारी के मद्देनजर विभिन्न प्रतिबंधों के कारण छठ पूजा करने के कई रंग दिखाई दिए। इस बार यमुना नदी में पूजा पर रोक होने के कारण श्रद्धालुओं ने नदी के किनारे कृत्रिम घाटों पर पूजा की। इसके अलावा वे पार्कों एवं अन्य इलाकों में खाली स्थान पर बने कृत्रिम घाटों पर पूजा करने पहुंचे, वहीं बहुत से श्रद्धालुओं ने अपने घरों की छत, परिसर एवं गली में टप में खड़े होकर पूजा की। जमुना बाजार में यमुना नदी के किनारे कुछ श्रद्धालुओं ने टप में पूजा की, दरअसल नदी में प्रवेश करने पर प्रतिबंध के कारण उन्होंने यह व्यवस्था की।