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दिल्ली: भारतीय निवेशकों पर चीन का साइबर अटैक, कई हजार करोड़ का हो सकता है डिजिटल हवाला

Thu, 08 Jul 2021 09:38 AM IST
प्राची प्रियम शुजात आलम, नई दिल्ली

सार

पुलिस ने अभी एक ही चेन का खुलासा किया है। जांच में पता चला है कि आरोपी शराब, खाने के मसाले और गोल्ड में निवेश करने का झांसा देते थे। इसके बाद अपनी फर्जी कंपनियों में रुपये ट्रांसफर करवाते थे।
 
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Cyber Crime - फोटो : Social Media
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विस्तार
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चीन से बैठकर भारत में ठगी करने वाले शातिर बदमाशों के भारत से कई हजार करोड़ रुपये ठगने की आशंका व्यक्त की जा रही है। माना जा रहा है कि बुधवार को गुरुग्राम से गिरफ्तार किए गए नागाराजू और कोनडाला सुभाष तो बहुत छोटे से मोहरे हैं। देशभर में ऐसे मोहरों की भरमार हो सकती है। ठगी का शिकार हुए वरण शर्मा ने चार अलग-अलग कंपनियों में निवेश किया था। 

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जिसके बाद पुलिस ने एक कंपनी के जरिये नागाराजू व कोनडाला को गिरफ्तार कर एक ही चेन का खुलासा किया है। वरुण के ही मामले में इन चीनी नागरिकों की बाकी तीन चेन का पता लगाना भी बाकी है। जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि विदेशी नागरिक ऐसी कई और चेन से ठगी कर रहे हैं। 

ऐसे में डिजिटल माध्यम से हजारों करोड़ रुपये देश से बाहर जाने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वह अंजान और भ्रामक कंपनियों में निवेश कतई न करें। ऐसा करके वह ठगी का शिकार हो सकते हैं।
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मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि चीन सरगना भारतीय नागरिकों को शराब, खाने के मसालों और गोल्ड में निवेश करने का झांसा देते थे। शुरुआत में कम निवेश करने पर आरोपी 20 फीसदी से ज्यादा मुनाफा देते थे। ज्यादा रुपये लगाते ही आरोपी पीड़ितों से रुपये निकालने के लिए मना कर देते थे। 

वह कहते थे कि रुपये निकालने का अभी सही समय नहीं है। झांसे में लेकर आरोपी पीड़ितों की रकम को बड़े ही आसानी से निकाल लेते थे। नागाराजू ने खुलासा किया है कि उसने अपनी कंपनी के खातों के एक्सिस देने के अलावा अपने कई रिश्तेदारों व दोस्तों के बचत खातों के इस्तेमाल करने के लिए चीनी नागरिकों को देते थे। इन खातों में भी ठगी की रकम आती थी। 

पुलिस की पूछताछ में आरोपी नागाराजू ने बताया कि 2017 तक वह कॉल सेंटर में काम करता रहा। कई कंपनियो में काम करने के बाद वह चीनी नागरिकों के संपर्क में आया। सबसे पहले उसकी बातचीत डिंगटॉक एप के जरिये वेंडी से हुई। इसके बाद वह लुओ के संपर्क में आया। दोनों चीनी नागरिक भारत में फर्जी कंपनियां खोलना चाहते थे। दो से तीन लाख रुपये लेकर नागाराजू ने फर्जी कंपनियां खोली।

चीनी नागरिक वेंडी और लुओ फर्जी कंपनी के डायरेटरों के लिए 25 से 30 हजार रुपये सैलरी भी देने लगे। लेकिन नागाराजू कंपनी के निदेशकों को आठ हजार रुपये ही देता था। नागाराजू द्वारा खोली गई कंपनियों के करंट अकाउंट के साथ फोन नंबर भी अटैच थे। मोबाइल भारत में ही रहते थे, लेकिन चीनी नागरिकों ने उन मोबाइल को मोबाइल एप एनी डेस्क से जोड़ा हुआ था। 

इसके जरिये विदेश में बैठे-बैठे ही वह भारतीय खातों को ऑपरेट कर अपने खातों में रकम ट्रांसफर करवा लिया करते थे। पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है। बाकी चेन का भी पता लगाने का प्नरयास किया जा रहा है।

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