राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने सराय काले खां नमो भारत स्टेशन पर कॉमर्शियल स्पेस के लाइसेंस के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं। इसका उद्देश्य यात्रियों को स्टेशन परिसर में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और स्टेशन क्षेत्र को आधुनिक शहरी ट्रांजिट हब के रूप में विकसित करना है।
एनसीआरटीसी के अनुसार, स्टेशन के ग्राउंड फ्लोर पर करीब 818 वर्गमीटर क्षेत्र को ई-टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से लाइसेंस दिया जाएगा। इच्छुक कंपनियां और कारोबारी 17 जून तक आवेदन कर सकेंगे। उपलब्ध स्पेस में कुल आठ यूनिट शामिल हैं, जिनका आकार 17 वर्गमीटर से लेकर 247 वर्गमीटर तक है। लाइसेंस अवधि 9 से 15 वर्ष तक निर्धारित की गई है। इन स्थानों का उपयोग कैफे, फूड एंड बेवरेज आउटलेट, कन्वीनियंस स्टोर, सर्विस सेंटर, पॉड सेवाएं और अन्य रिटेल गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा।
एनसीआरटीसी का कहना है कि इससे यात्रियों को स्टेशन परिसर में ही जरूरी सुविधाएं मिल सकेंगी और यात्रा अधिक सुविधाजनक बनेगी। 82 किलोमीटर लंबा दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर देश का पहला रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) प्रोजेक्ट है। सराय काले खां स्टेशन इस कॉरिडोर का प्रमुख मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब बनकर उभर रहा है। यह स्टेशन हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन, वीर हकीकत राय आईएसबीटी, दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन और रिंग रोड से सीधे जुड़ा है। हाल ही में एनसीआरटीसी ने सराय काले खां स्टेशन और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के बीच 280 मीटर लंबा कवर फुटओवर ब्रिज भी शुरू किया है। निगम का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी और संभावित भारी यात्री संख्या के कारण यह क्षेत्र ट्रांजिट आधारित व्यावसायिक विकास के लिए उपयुक्त साबित होगा।
यात्री अब साझा कैब कर सकेंगे बुक
आईजीआई एयरपोर्ट से अब सस्ती उबर शेयर कैब बुक कर सकते हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को सचिवालय से उबर शेयर सेवा की शुरुआत की। इसके जरिए एक ही दिशा में जाने वाले यात्री साझा कैब बुक कर सकेंगे, जिससे सफर सस्ता और सुविधाजनक होगा। मुख्यमंत्री ने दिल्ली सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में यह सेवा लॉन्च की। इस मौके पर पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा भी मौजूद रहे। अभी नई सेवा की शुरुआत आईजीआई एयरपोर्ट से की गई है। एक ही दिशा में सफर करने वाले लोग मल्टी-लेवल कार पार्किंग से एक साथ यात्रा कर पाएंगे। सरकार का कहना है कि इससे यात्रियों का किराया कम होगा और सड़कों पर गाड़ियों का दबाव भी घटेगा।