नई दिल्ली। मीटू अभियान से जुड़े आपराधिक मानहानि के मामले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री एमजे अकबर ने महिला पत्रकार के साथ किसी भी तरह का समझौता करने से मंगलवार को इनकार कर दिया। उन्होंने कोर्ट के समक्ष कहा कि अगर महिला पत्रकार अपने आरोपों के लिए माफी मांगती है और केस वापस लेने की अपील करती हैं तो वह इस बारे में सोच सकते हैं।
राउज एवेन्यू अदालत के एसीएमएम रविन्द्र कुमार पांडेय ने याचिकाकर्ता अकबर की वकील गीता लूथरा द्वारा समझौता न करने के संबंध में दी गई जानकारी के बाद मामले में नए सिरे से सुनवाई शुरू की। इससे पहले न्यायाधीश ने दोनों पक्षों से मामले को आपसी समझौते के जरिये सुलझाने पर विचार करने के लिए कहा था।
कोर्ट के समक्ष आरोपी महिला पत्रकार के वकील भावुक चौहान ने कहा कि उनकी मुवक्किल अपने बयान पर अडिग हैं। अगर अकबर अपना केस वापस लेना चाहते हैं तो वापस ले सकते हैं, लेकिन उनके द्वारा लगाए गए आरोप सत्य हैं। वह पूर्व केन्द्रीय मंत्री से माफी नहीं मांगेगी। महिला पत्रकार के वकील ने कहा कि मामले में आगे कार्रवाई के लिए उनकी मुवक्किल तैयार हैं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई 2 दिसंबर के लिए तय कर दी। मामले की सुनवाई अंतिम पड़ाव में है लेकिन पहले सुनवाई कर रहे न्यायाधीश का तबादला हो जाने के कारण अब एसीएमएम रविन्द्र कुमार पांडेय सुनवाई कर रहे हैं।
महिला पत्रकार ने सोशल मीडिया के जरिये मीटू अभियान में अक्तूबर 2018 को पूर्व केन्द्रीय मंत्री पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसके बाद अन्य 20 महिलाओं ने भी पूर्व केन्द्रीय मंत्री पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, जिसके बाद अकबर ने मंत्री पद से 15 अक्तूबर 2018 को इस्तीफा दे दिया था। हालांकि अकबर ने महिला पत्रकार के आरोपों को बेबुनियाद बताते मानहानि की शिकायत दायर की थी।