नई दिल्ली। भाजपा ने डीटीसी बसों की खरीदारी में भ्रष्टाचार का आरोप दिल्ली सरकार पर मढ़ा है। कहा है कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने 1000 डीटीसी बसों की खरीद में घोटाला किया है। इतना ही नहीं मामले को रफा-दफा करने के लिए दिल्ली सरकार ने अब बसों के खरीद ऑर्डर को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इस मामले में भाजपा ने सीबीआई जांच कराने की मांग दिल्ली के उपराज्यपाल से की है।
भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि बसों की खरीद के आदेश को वापस लिए जाने का समय संदेह के दायरे में आ गया है। सरकारी मशीनरी इस घोटाले पर पर्दा डाल रही है। बसों की खरीद का वर्क आर्डर जनवरी 2021 में जारी किया गया था और बसों की खरीद व रखरखाव के सभी काम को पूरा किया गया। इतना ही नहीं नवंबर 2020 में डीटीसी बोर्ड ने निविदा प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया। लेकिन बैठक के मिनट्स सार्वजनिक डोमेन में जारी नहीं किए गए थे। साढ़े तीन महीने के बाद नाटकीय अंदाज में वेबसाइट पर मिनट्स अपलोड किए गए।
गुप्ता ने कहा कि 890 करोड़ रुपये का 1000 लो-फ्लोर बसों का खरीद वर्क ऑर्डर दो निजी कंपनियों को तीन साल की वारंटी पर दिया गया था। तीन साल की वारंटी के बावजूद दिल्ली सरकार ने बसों के खरीदे जाने के पहले दिन से ही 350 करोड़ रुपये सालाना का आदेश इन बसों के रखरखाव के लिए दिया। मतलब साफ है कि दिल्ली सरकार बस आपूर्तिकर्ता निजी कंपनियों को अतिरिक्त 1000 करोड़ रुपये बसों के रख रखाव के लिए देने जा रही है।
गुप्ता ने बताया कि वित्तीय कदाचार मामले में विपक्ष ने 12 मार्च को लिखित शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को सौंपी। इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने आरोपों की जांच के लिए दिल्ली सरकार से अनुमति मांगी है। यहां भी दिल्ली सरकार ने फाइल को दबाकर प्रक्रिया को पटरी से उतारने की पूरी कोशिश की। अब वर्क आर्डर होने के 6 महीने बाद स्थगित किए जाने से पता चलता है कि दिल्ली सरकार भ्रष्टाचार उजागर होने पर मामले को दबाना चाह रही है।