सीडीएस जनरल बिपिन रावत (1958 - 2021)
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बच्चों को नई उड़ान का सपना दिखाने वाले थे जनरल विपिन रावत। वीरांगनाओं के साथ सैनिकों के बच्चों की पढ़ाई के लिए बराबर तत्पर रहने वालों में से थे। अपने पोस्टिंग के दौरान सैनिकों के बच्चों के लिए कोचिंग सेंटर चलवाते थे। पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन देने के साथ परीक्षा में बेहतर अंक लाने वालों को इनाम भी देते थे। यह कहना है कि उनकी कमांड में काम कर चुके पूर्व मेजर ईश्वर सिंह जाखड़ का।
जाखड़ बताते हैं कि जनरल विपिन रावत जब लखनऊ में सेंट्रल कमांड में थे तो उनके साथ काम करने का अनुभव मिला। वह सैनिकों के वेलफेयर से कभी समझौता नहीं करते थे। शहीदों के परिवार को किसी तरह की परेशानी नहीं आए, उसका ख्याल रखते थे। उनका अचानक से दुनिया छोड़ के जाना देश के लिए झटका है। देश सदमें में है।
पूर्व कर्नल कंवर भारद्वाज ने कहा कि आज भारतीय सैनिक विश्व में अपनी पहचान बना चुके हैं। जनरल विपिन रावत साकारात्मक सोच वाले सैनिक थे। डिफेंस में अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें बराबर याद किया जाएगा। आर्मी के आधुनिकीकरण में उनका विशेष योगदान रहा। वह आर्मी का एक कॉम्पैक्ट यूनिट बनाना चाहते थे, जो विश्व में नंबर वन होता। भारद्वाज कहते हैं कि जब वह लखनऊ के सेंट्रल कमांड में 1984 में थे, तब वह यंग ऑफिसर थे। बेहतर योजना तैयार करते थे। शहीदों के आश्रितों की भलाई के अभियान में सक्रिय रहते थे।