राजधानी में जीव, जंतुओं से लेकर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा। इस संबंध में लंबे समय से लंबित 11 सदस्यीय जैव विविधता काउंसिल को सरकार की ओर से मंजूरी मिल गई है। दिल्ली सरकार के वन एवं वन्यजीव विभाग ने दिल्ली के पांचों नगर निकायों को पत्र भेजकर जैव विविधता प्रबंधन समिति का गठन करने के लिए कहा है, जिन्हें अपने क्षेत्रों में मौजूद वन एवं जीव जंतुओं का लोक जैव विविधता पंजी (पीबीआर) के रूप में रिकॉर्ड रखना होगा। इस पर काउंसिल समितियों का सहयोग करने के साथ उन पर निगरानी भी रखेगी।
दरअसल, जैव विविधता अधिनियम के तहत राज्यों में जहां जैव विविधता बोर्ड का गठन होना था, वहीं केंद्र शासित प्रदेशों में जैव विविधता काउंसिल का गठन किया जाना था। लेकिन, दिल्ली में काउंसिल के गठन की योजना लंबे समय से ठंडे बस्ते में थी। लेकिन, कुछ समय पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ओर से योजना का अमलीजामा पहनाने के लिए आदेश जारी हुआ था। इसके बाद जैव विविधता काउंसिल का जल्द से जल्द गठन करने को लेकर प्रयास शुरू हो गए थे।
समिति में सात सदस्य होंगे शामिल
दिल्ली में जैव विविधता प्रबंधन समिति ने दिल्ली के उत्तरी, पूर्वी, दक्षिणी निगम, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली कैंट को पत्र लिखकर समिति का गठन करने के लिए कहा गया है। इसका उद्देश्य अपने क्षेत्रों में वनों, वनस्पतियों और जीव जंतुओं का संरक्षण एवं और उनके आवास का संरक्षण, लोक किस्मों और जैव विविधता से संबंधित ज्ञान का लेखन (डॉक्यूमेनटेशन) करने के साथ एक पीबीआर रिकॉर्ड बनाना होगा।
प्रबंधन समिति में कुल सात सदस्यों को शामिल किया जाएगा, जिसमें दो महिलाएं व एससी या एसटी वर्ग के एक व्यक्ति भी समिति में मौजूद रहेगा। समिति सदस्यों के अलावा तकनीकी विशेषज्ञों का साथ बैठक करेगा। इसके बाद इलाके में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी, जिसे तकनीकी विशेषज्ञ द्वारा विश्लेषण व सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद पीबीआर को तैयार कर ई-पीबीआर के रूप में वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी।
जैव विविधता काउंसिल को लेकर अलग से एक वेबसाइट भी बनाई जाएगी। इस पर ई-पीबीआर को अपलोड किया जाएगा। हालांकि, इस वेबसाइट के अलावा लोग निगमों की वेबसाइट पर भी जैव विविधता को लेकर जानकारी ले सकेंगे। प्रकृति से जुड़े सभी लेखा-जोखा को वेबसाइट पर समय-समय पर अपडेट किया जाएगा।
लोदी गार्डन से लेकर संजय झील होगी शामिल
प्रबंधन समितियों द्वारा पीबीआर तैयार होने पर इसमें दिल्ली के प्रमुख प्राकृतिक स्थलों को शामिल किया जाएगा। इसमें असोला भाटी अभ्यारण्य, सेंट्रल रिज, दिल्ली की एक हजार से अधिक नम भूमि, लोधी गार्डन, नजफगढ़ नाला, संजय वन और दिल्ली चिड़ियाघर जैसे प्रमुख प्राकृतिक स्थलों को पीबीआर में शामिल किया जाएगा।
प्राकृतिक संसाधनों का नहीं होगा दुरुपयोग
काउंसिल बनने के बाद प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग को भी रोका जा सकेगा। दरअसल, जीव-जंतुओं से लेकर प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल बड़ी कंपनियों द्वारा दवाइयों से लेकर सौंदर्य प्रसाधनों को बनाने में किया जाता है। इसी प्रकार वैद्य व हकीम भी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल कर दवाइयां बनाते हैं। ऐसे में प्रबंधन समितियां संसाधनों के उपयोग और खर्च का भी लेखा-जोखा रखेगी।
काउंसिल में ये होंगे सदस्य
जैव विविधता काउंसिल में कुल 11 सदस्य होंगे। इसके पहले सदस्य सचिव दिल्ली सरकार के मुख्य वन्यजीव वार्डन निशिथ सक्सेना होंगे। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय के एमिरेट्स प्रोफेसर सीआर बाबू काउंसिल का नेतृत्व करेंगे। इनके अलावा शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन विभाग के प्रधान मुख्य संरक्षक, विकास आयुक्त, दिल्ली पार्क्स एंड गार्डन सोसाइटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अरावली जैव विविधता पार्क के क्यूरेटर विजय दशमाना, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) के प्रो. सुमित दुकिया, इंटेक से डॉ. रितु सिंह व मनु भटनागर हैं।
पीबीआर में शामिल होंगी यह जानकारी
पीबीआर तैयार करने के लिए दिल्ली के तमाम विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, छात्र, कृषि क्षेत्र से जुड़े लोग, पशुपालन, मछली पालन और वन विशेषज्ञों को शामिल करना होगा। इसमें क्षेत्र का भूमि परिदृश्य, जल परिदृश्य, जैव विविधता, लोगों की पारंपरिक जानकारी जैसे कृषि व पशुपालन और प्रबंधन मामलों पर लोगों के विचारों को रिकॉर्ड किया जाएगा। प्रबंधन समिति की ओर से तैयार किए जाने वाले पीबीआर में वन एवं वनस्पतियों से लेकर जीव-जंतुओं का विस्तार से रिकॉर्ड रखना होगा।
क्या होगा पीबीआर का लाभ
- स्थानीय लोगों की आजीविका को मदद करने के लिए कृषि, पशुपालन, वन संसाधनों एवं स्थायी प्रबंधन को बढ़ावा देना।
- जैव विविधता से संबंधित चिंताओं और प्रतिकूल गतिविधियों के प्रभाव को दूर करने में मदद करना।
- स्थानीय परंपराओं और विज्ञान को एक साथ लाकर सहेजना।
दिल्ली में प्राकृतिक संसाधनों का सहेजने के लिए नगर निकायों को प्रबंधन समितियां बनाने के लिए पत्र भेजा गया है। प्रयास है कि दिल्ली के पेड़-पौधों से लेकर जीव-जंतुओं का संरक्षित किया जा सके।
- निशिथ सक्सेना, मुख्य वन्यजीव वार्डन, वन एवं वन्यजीव विभाग, दिल्ली सरकार