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चीनी जालसाजी में एक और खुलासा, सिर्फ नौ खातों में जमा हुए 165 करोड़ रुपये

Sat, 12 Jun 2021 05:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली

सार

  • फर्जी कंपनियों को प्रमाणित करने वाली कंपनी सचिव महिला और पुरुष मॉडल को किया गिरफ्तार
  • अब तक सौ से ज्यादा बैंक अकाउंट का पता लगा चुकी है साइबर सेल 
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demo pic - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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चीनी जालसाजों के पांच लाख से ज्यादा भारतीयों को ठगने के मामले में रोज बड़े खुलासे हो रहे हैं। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने अब तक जालसाजों के भारत में मौजूद 100 से ज्यादा बैंक खातों का पता लगाया है। इनकी संख्या और बढ़ सकती है।

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साइबर सेल ने शुक्रवार शाम तक नौ बैंक खातों की जांच कर पता लगाया है कि इनमें कुल 165 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। इनमें से ज्यादातर खाते नोएडा व गुरुग्राम की शाखाओं में हैं। साइबर सेल को आशंका है कि बाकी खातों में भी इसी अनुपात में रकम जमा हुई होगी तो ठगी की रकम बहुत बढ़ जाएगी।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक खाते में रकम को कम करके दूसरे, तीसरे व चौथे बैंक खाते में भेजा जाता था। इसके बाद उसे क्रिप्टो करेंसी में बदलवाकर विदेश भेज दिया जाता। क्रिप्टो करेंसी के जरिये अब तक नौ करोड़ रुपये भेजने की बात सामने आ चुकी है। शुक्रवार को साइबर सेल ने हरिनगर में घंटाघर से एक कंपनी सचिव महिला रजनी कोहली व एक मॉडल युवक कंपनी डायरेक्टर को गिरफ्तार किया। 
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इस युवक के बारे में सेल ज्यादा खुलासा नहीं कर रही है। रजनी कोहली चीनी जालसाजों की फर्जी कंपनियों को वेरीफाई करती थी। उसका कहना है कि वह वर्ष 2019 से चीनी जालसाजों के लिए काम कर रही है। एक चीनी महिला के साथ काम करते-करते वह जालसाजों के संपर्क में आई थी। वह चीनी महिला अब भारत से जा चुकी है। 

तलाकशुदा रजनी कोहली (35) ने दावा किया कि उसे एक कंपनी को वेरीफाई करने के लिए 40 हजार रुपये मिलते थे। पुलिस को उसकी बात पर विश्वास नहीं है। कंपनी खोलने के लिए पहले रजिस्टर्ड कंपनी सचिव से उसके कागजात वेरीफाई कराने होते हैं। रजनी ने हाल ही में कंपनी सचिव के पद से इस्तीफा दिया है। 

टैक्स में सावधानी बरतते थे जालसाज
साइबर सेल के अधिकारी ने बताया कि अब तक की जांच में पता चला है कि फर्जी कंपनियों के अधिकारी जीएसटी आदि अन्य टैक्स ईनामदारी से देते थे, ताकि किसी को कंपनी पर संदेह न हो। आरोपियों की एक कंपनी ने एक बार में दस लाख रुपये तक जीएसटी जमा कराई थी। जांच में पता चला कि चीनियों ने भारत में अपने एजेंटों के छोटे-छोटे मॉड्यूल बना रखे थे और उनके जरिये ठगी कर रहे थे।
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