दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोविड महामारी के बीच एलोपैथी के खिलाफ योग गुरु रामदेव पर सार्वजनिक उपद्रव और गलत बयानी का आरोप लगाने वाली सात डॉक्टर्स एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई 19 जुलाई को तय की है। अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील को कथित गलत सूचना से संबंधित वीडियो को रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ऋषिकेश, पटना स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के तीन रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन और भुवनेश्वर, रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़, यूनियन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स ऑफ पंजाब (यूआरडीपी), रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, मेरठ और तेलंगाना जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन, हैदराबाद ने याचिका दायर की है।
एसोसिएशनों की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अखिल सिब्बल और अधिवक्ता हर्षवर्धन कोटला ने तर्क रखा कि रामदेव एलोपैथी को बदनाम करने के लिए जनता को गुमराह कर गलत तरीके से यह दर्शा रहे हैं कि कोविड-19 वायरस से संक्रमित कई लोगों की मौतों के लिए एलोपैथी जिम्मेदार है। इतना ही नहीं रामदेव ने कहा है कि एलोपैथिक डॉक्टर मरीजों की मौत और मुनाफाखोरी का कारण बन रहे हैं।
याचिका में कहा गया है कि योग गुरु न केवल एलोपैथिक उपचार बल्कि कोविड-19 टीकों की सुरक्षा और प्रभावकारिता के संबंध में आम जनता के मन में संदेह बो रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक बेहद प्रभावशाली व्यक्ति होने के नाते यह आशंका जताई जा रही है कि रामदेव के बयान लाखों लोगों को प्रभावित कर सकते हैं और उन्हें एलोपैथिक उपचारों से हटा सकते हैं जो सरकार द्वारा देखभाल के मानक रूप के रूप में निर्धारित किए जाते हैं।
याचिका में आरोप लगाया कि गलत सूचना अभियान के तहत रामदेव ने अपने उत्पाद की बिक्री को बढ़ाने के लिए यह तरीका एक विज्ञापन और विपणन रणनीति के लिए अपनाया है। इसमें कोरोनिल दवा भी शामिल है जो कोविड-19 के लिए एक वैकल्पिक उपचार होने का दावा करती है।
एसोसिएशन ने दलील दी है कि अगस्त में कोविड-19 की तीसरी लहर आने की संभावना है, यह जरूरी है कि रामदेव के निरंतर गलत सूचना अभियान को विराम लगाया जाए। कोर्ट ने तीन जून को एलोपैथिक दवाओं के खिलाफ अपने बयानों के संबंध में दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन की याचिका पर रामदेव को समन जारी किया था।