तीनों नगर निगम के चुनाव अप्रैल माह में नहीं कराए जाने और विलय करने की स्थिति में उन्हें 31 मार्च को भंग नहीं करने पर सांविधानिक संकट खड़ा हो सकता है, क्योंकि नगर निगम अधिनियम के तहत अप्रैल माह में सदन की होने वाली पहली बैठक में महापौर का चुनाव कराना आवश्यक है और अधिनियम में एक कार्यकाल में छठे साल महापौर की नियुक्ति की व्यवस्था और चुनाव कराने का प्रावधान नहीं है।
नगर निगम अधिनियम के अनुसार प्रत्येक वर्ष 31 मार्च को महापौर का कार्यकाल समाप्त हो जाता है और अप्रैल माह में सदन की पहली बैठक में महापौर का चुनाव कराने का प्रावधान है। इतना ही नहीं, नगर निगम में महापौर पद पर पहले साल महिला एवं तीसरे साल अनुसूचित जाति के पार्षद की ही नियुक्ति की व्यवस्था है, जबकि दूसरे, चौथे एवं पांचवें साल कोई भी पार्षद महापौर बन सकता है।
तीनों नगर निगमों के वर्तमान कार्यकाल में उनके अधिनियम के तहत पांचों साल महापौर की नियुक्ति के लिए चुनाव हो चुके है और छटे वर्ष महापौर का चुनाव कराने का प्रावधान नहीं है। ऐसी स्थिति में अप्रैल माह में तीनों नगर निगम के सदन की बैठक कराना असंभव है। इस तरह तीनों नगर निगम स्वयं ही भंग होने की नौबत आ जाएगी, क्योंकि नगर निगम अधिनियम के तहत प्रत्येक माह सदन की बैठक होनी आवश्यक है।
करीब एक माह देरी से होंगे चुनाव
तीनों नगर निगम का विलय होने की स्थिति में नगर निगम के चुनाव करीब एक माह देरी से हो पाएंगे। वार्डों की संख्या आधी करने का निर्णय होता है तो नगर निगम के चुनाव कम से कम छह माह तक टल सकते हैै, क्योंकि वार्डों का नए सिरे सेे परिसीमन करना होगा। हालांकि, वार्डों की संख्या कम करने की बात पुख्ता तौर पर सामने नहीं आई है, जबकि तीनों नगर निगम का विलय करने के संबंध में केंद्र सरकार ने मंशा जाहिर की है।
दिल्ली राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त एसके श्रीवास्तव ने कहा है कि आयोग तीनों नगर निगमों के चुनाव कराने के लिए पूरी तैयार है। हालांकि, उन्होंने तीनों नगर निगमों का विलय होने पर अस्तित्व में आने वाले एक नगर निगम के चुनाव कराने की तैयारी के संबंध में कोई खुलासा नहीं किया। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि एक नगर निगम होने पर उसके वार्ड आरक्षित करने के फार्मूले में कोई परिवर्तन नहीं होगा। जिस फार्मूले से 25 जनवरी को तीनों नगर निगमों के वार्ड आरक्षित किए थे वैसे ही नगर निगम के वार्ड भी आरक्षित किए जाएंगे।
इस तरह पांच साल पहले तीनों नगर निगमों के जो वार्ड सामान्य थे वह महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे, जबकि जो वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित थे वह सामान्य होंगे, वहीं अनुसूचित जाति के लिए उन वार्डों का आरक्षित किया जाएगा जो अनुसूचित जाति की संख्या के मामले में दूसरे स्थान पर होंगे।