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हाईकोर्ट: लुका-छिपी खेलने पर एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो को लगाई फटकार, अदालत का वक्त बर्बाद न करने की दी हिदायत  

Tue, 11 Jan 2022 11:06 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

याचिकाकर्ता (डीएएमईपीएल) के वकील अदालत के समक्ष पेश होने के साथ ही विवाद को निपटाने के लिए निर्णय देनदार (डीएमआरसी) के साथ संवाद कर रहा है और डिक्री धारक स्वच्छ इरादे के साथ अदालत नहीं पहुंच रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सहायक कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमईपीएल) को अदालत के साथ लुका-छिपी खेलने और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के साथ 4,600 करोड़ रुपये के विवादित मामले को सुलझाने के लिए अदालत के बाहर संवाद करने पर फटकार लगाई है। उच्च न्यायालय ने कहा कि दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमईपीएल) निष्पक्ष सोच के साथ अदालत नहीं पहुंच रही है। कंपनी को अदालत का वक्त बर्बाद न करने की हिदायत भी दी गई है।

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याचिकाकर्ता (डीएएमईपीएल) के वकील अदालत के समक्ष पेश होने के साथ ही विवाद को निपटाने के लिए निर्णय देनदार (डीएमआरसी) के साथ संवाद कर रहा है और डिक्री धारक स्वच्छ इरादे के साथ अदालत नहीं पहुंच रहा है। 29 मार्च को भी अदालत ने टिप्पणी की थी कि डीएएमईपीएल कोर्ट के साथ लुका छिपी खेल रहे हैं। अदालत का अधिक समय बर्बाद न करें। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि कंपनी अपने पक्ष में एक डिक्री होने के बाद भी अदालत के प्रति निष्पक्ष नहीं थी। 

अदालत ने कहा कि 22 दिसंबर, 2021 के अपने आदेश के अनुसार, डीएमआरसी ने एक हलफनामा दायर किया। इसमें शेष राशि के साथ अपने बैंक खातों का विवरण प्रस्तुत किया गया है। डीएमआरसी का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता पराग त्रिपाठी ने प्रस्तुत किया कि वह रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर सहायक की देनदारियों को पुरस्कार राशि की सीमा तक लेने के लिए तैयार है, क्योंकि यह ऋणदाता बैंकों के साथ बातचीत करने के लिए एक बेहतर स्थिति होगी। हालांकि डीएएमईपीएल ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया था।
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डीएएमईपीएल की ओर से डीएमआरसी को लिखे गए 30 दिसंबर, 2021 के पत्र के बारे में अदालत को सूचित किया गया। इसमें पूछा गया था कि क्या वह अपने कर्ज को लेने के लिए तैयार है, जिसे डीएएमईपीएल और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की तरफ से अपने ऋणदाताओं को भुगतान किया जाना था। डीएमआरसी ने पत्र के जवाब में कहा कि डीएएमईपीएल को पहले अपनी देनदारियों की पूरी राशि का खुलासा करना चाहिए। इस पर न्यायाधीश ने कहा कि डीएएमईपीएल अदालत में एक अलग रुख अपना रहा था, जबकि वह विवाद को निपटाने के लिए डीएमआरसी को पत्र लिख रहा था। अगर आप कोर्ट के बाहर विवाद सुलझा रहे हैं तो कोर्ट का समय क्यों बर्बाद कर रहे हैं। जब मामला कोर्ट में हो तो आपस में बात न करें या अगर चाहते हैं तो केस वापस ले लें।

भुगतान में देरी की कोशिश कर रही है डीएमआरसी
अदालत रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की सहायक कंपनी की अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। इसमें दावा किया गया था कि डीएमआरसी जानबूझकर उसके खिलाफ 4,600 करोड़ रुपये से अधिक के मध्यस्थ पुरस्कार के निष्पादन में देरी करने की कोशिश कर रहा था। इससे रोजाना करीब 1.75 करोड़ रुपये का ब्याज जुड़ रहा है। आवेदन में कहा गया है कि डीएमआरसी अपने सभी बैंक खाते के विवरण का खुलासा करने के आदेश के बावजूद महज 1,642.69 करोड़ रुपये के बैंक खाते के विवरण दे रहा है। इससे पहले दिसंबर 2021 में दायर हलफनामे में कुल उपलब्ध धनराशि 5,800.93 करोड़ रुपये होने का खुलसा किया था। हालांकि, डीएमआरसी ने सोमवार को अदालत में एक और हलफनामा दायर कर अपने सभी बैंक खातों में 6,208 करोड़ रुपये मौजूद होने की बात कही है। एक मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने मई 2017 के फैसले में डीएएमईपीएल के पक्ष में फैसला सुनाया था।

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