बुजुर्गों को बेहतर चिकित्सीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली एम्स में नेशनल ऐजिंग सेंटर की स्थापना की जाएगी। इस सेंटर की घोषणा करीब पांच वर्ष पहले हुई थी लेकिन एम्स ने अब जाकर यहां इलाज करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों के पद निकाले हैं। करीब 250 स्वास्थ्य कर्मचारियों को यहां तैनात किया जाएगा जो एम्स में बुजुर्गों की चिकित्सीय सेवा पर कार्य करेंगे।
जानकारी के अनुसार साल 2015 में मोदी सरकार ने दिल्ली एम्स सहित देश में दो नेशनल ऐजिंग सेंटर की स्थापना करने की घोषणा की थी। इसके तहत एम्स के जीरिएट्रिक विभाग को बढ़ावा देते हुए सेंटर में तब्दील करने का प्रयास शुरू भी हुआ। साथ ही एम्स परिसर में अलग से एक ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव भी पास हुआ। अभी इस ब्लॉक का निर्माण कार्य चल रहा है।
एम्स प्रबंधन के अनुसार एम्स ने अब नेशनल ऐजिंग सेंटर के लिए फैकल्टी और नॉन फैकल्टी पोस्ट जारी की हैं। अलग अलग विशेषज्ञता हासिल 15 सहायक प्रोफेसर, 42 जूनियर और सीनियर रेजीडेंट, 150 नर्सिंग ऑफिसर, 20 सीनियर नर्सिंग ऑफिसर सहित 249 पदों पर नियुक्ति की तैयारी शुरू कर दी है। प्रबंधन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत सरकार के डीओई विभाग से पदों की अनुमति को लेकर समय लगा था लेकिन अब इन पदों पर नियुक्ति के साथ ब्लॉक के निर्माण कार्य पूरा होने और सेंटर को शुरू करने की दिशा में तेजी से कार्य आगे बढ़ा है।
सूत्रों से जानकारी मिली है कि साल 2024 से पहले एम्स के सभी लंबित प्रोजेक्ट को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। अभी भी एम्स परिसर में कई ऐसे ब्लॉक का निर्माण कार्य चल रहा है जिन्हें साल 2014 या उससे पहले अनुमति मिल चुकी है। इन सभी प्रोजेक्ट को पूरा करने और मरीजों को सौंपने के लिए टाइमलाइन भी दी जा रही हैं।
एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि नेशनल ऐजिंग सेंटर की स्थापना होने के बाद चिकित्सीय क्षेत्र में भारत एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकेगा। अभी तक देश में युवाओं की आबादी सबसे अधिक है लेकिन अगले कुछ वर्षों में यह आबादी बुजुर्ग अवस्था की ओर भी बढ़ने लगेगी। चूंकि अधिकांश बीमारियां 45 वर्ष से अधिक आयु में लोगों को अपनी चपेट में लेती हैं। ऐसे में अगर बुजुर्गावस्था को लेकर अभी से ध्यान नहीं दिया गया तो अगले कुछ सालों में अस्पतालों में युवाओं के साथ साथ बुजुर्ग मरीजों की संख्या भी अत्यधिक देखने को मिलेगी।
उन्होंने बताया कि इस सेंटर में सभी तरह की जांच, उपचार, चिकित्सीय परामर्श इत्यादि उपलब्ध होगी। मरीज को अलग से काउंटर पर जाने की जरूरत नहीं होगी। बुजुर्गावस्था का ध्यान रखते हुए पंजीयन इत्यादि की प्रक्रिया लंबी नहीं होगी। साथ ही यहां काउंसलिंग और फिजियोथैरेपी जैसी सेवाएं भी उपलब्ध होगीं।
आजादी के बाद बढ़ी है जीवन प्रत्याशा
एम्स के अनुसार भारतीयों की जीवन प्रत्याशा आजाद के समय 1947 में 32 वर्ष से बढ़कर अब 68 वर्ष तक पहुंच चुकी है। जनसंख्या और उम्र बढ़ने की इस घटना ने स्वास्थ्य प्रणाली सहित समाज की हर संस्था को प्रभावित किया है। वृद्ध लोगों को वित्तीय सुरक्षा, भावनात्मक और सामाजिक समर्थन की आवश्यकता होती है। ऐसे में स्वास्थ्य और कार्यात्मक क्षमता के साथ वरिष्ठ नागरिकों को प्रभावी व सस्ती स्वास्थ्य देखभाल की नियमित आवश्यकता है। इसलिए यह सेंटर की स्थापना की जा रही है।