यूक्रेन के कीव एयरपोर्ट पर रूसी हमले का असर भारतीय बच्चों पर पड़ा। पहले फ्लाइट की बुकिंग के बावजूद संकट से बचने का रास्ता नहीं मिला और बाद में जब ट्रेन, बस या दूसरे परिवहन विकल्पों को अपनाया तो बॉर्डर पर इंतजार और परेशानियां झेलनी पड़ीं। हालांकि छात्र-छात्राओं का कहना है कि यूक्रेन से बाहर निकलने के बाद सरकार और दूतावास की तरफ से किए गए इंतजामों से उन्हें काफी सुकून मिला।
फिरोजपुर की छात्रा प्रकृति ने बताया कि लगातार मिसाइल हमले को देखते हुए उनके हॉस्टल पर लगे किसी उपकरण को उतारने के लिए सुरक्षा कर्मियों ने कई बार आवाजें लगाई। नहीं खुलने पर गेट तोड़ दिया गया, नतीजतन तेज आवाज से सभी खौफजदा हो गए। उसने बताया कि बम धमाके और सायरन की आवाज भारत पहुंचने के बाद भी कानों में गूंज रही है।
प्रकृति के आईजीआई एयरपोर्ट पहुंचने से पहले उनके दादा, दादी, पापा, मम्मी और छोटी बहन अगवानी करने पहुंच गई थीं। जैसे ही प्रकृति पहुंची, हर तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम के नारे लगने लगे। मम्मी कंचन ठाकुर ने बताया कि हॉस्टल गेट के टूटने के बाद बेटी से तीन घंटे तक फोन पर बातचीत नहीं हो रही थी तो उनके लिए एक-एक पल बिताना मुश्किल हो गया था।
लगातार टेलीविजन चैनल के सामने बैठी रहीं। वह बेटी के सुरक्षित पहुंचने पर उससे गले मिलकर रोने लगीं।दादा, दादी भी अपनी बिटिया का देखकर अपने आंसुओं को रोक नहीं सके। दरअसल कीव में लगातार हो रहे धमाकों के बीच अचानक प्रकृति की परिजनों से बातचीत बंद हो गई। करीब तीन घंटे बाद फोन पर उसकी खैरियत की सूचना मिली तो राहत मिली।
कीव में प्रवेश करते ही ट्रेन के नजदीक हुआ धमाका
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारतीय बच्चों का यूक्रेन छोड़कर देश लौटने का सिलसिला जारी है। रविवार को आईजीआई एयरपोर्ट पर पहुंची मथुरा के कोसी कलां की रहने वाली यशिका ने बताया कि वह खारकीव में खारकीव नेशनल मेडिकल विश्वविद्यालय में एमबीबीएस पहले साल की छात्रा हैं।
पिछले साल दिसंबर में डॉक्टर बनने का सपना लिए वह खारकीव चली गईं। पढ़ाई चल ही रही थी कि रूस ने यूक्रेन पर कब्जा करने के लिए खारकीव समेत अन्य शहरों पर हमला कर दिया। 28 फरवरी को हॉस्टल से रेलवे स्टेशन जाने के लिए निकली। 10 किलोमीटर का सफर तय करने के दौरान हर 200 मीटर की दूरी पर तीन बार बम धमाके हुए और वह खौफ से कांप उठी।
बावजूद इसके वह आगे बढ़ती गई और खारकीव रेलवे स्टेशन पहुंची। खारकीव से ट्रेन पकड़कर कीव के रास्ते लवीव पहुंचना था और वहां से बस के सहारे रोमानिया बॉर्डर। यशिका ने बताया कि ट्रेन में बैठकर घर पर वीडियो कॉल से बात कर घरवालों को जानकारी दे रही थी कि वह सही सलामत ट्रेन में बैठ गई है। थोड़ी दूर चलने पर ट्रेन ने कीव की सीमा में प्रवेश किया, तभी ट्रेन के नजदीक बम धमाका हो गया।
ट्रेन में मौजूद सभी लोगों को शांत रहने के लिए कहा गया। एक बोगी में 100 लोगों के बैठने की जगह पर 250 लोग सफर कर रहे थे। सभी एकदम चुप हो गए, लग रहा था कि बम ट्रेन के अंदर ही फूट गया हो और सब खत्म हो गया। एक घंटे बाद ट्रेन लवीव के लिए चली तब लोगों की जान में जान आई। लवीव पहुंचने के बाद बस से वह रोमानिया बॉर्डर पहुंची।