नई दिल्ली। अधिवक्ता महमूद प्राचा ने अदालत से उनके कार्यालय की तलाशी के दौरान की गई वीडियोग्राफी फुटेज की कॉपी और जब्त की गई सामग्री की कॉपी दिलवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि छापे की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और सच्चाई सामने लाने के लिए वीडियोग्राफी फुटेज की कॉपी जरूरी है।
अदालत ने मामले की सुनवाई 29 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अधिकारियों ने 24 दिसंबर 2020 को महमूद प्राचा के कार्यालय परिसर में पहली बार तलाशी ली थी।
पटियाला हाउस अदालत के मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा के समक्ष प्राचा ने तर्क रखा कि मामले में रिकॉर्ड न केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित है बल्कि इसमें वीडियोग्राफी भी शामिल है। इस कारण वह इस तरह के फुटेज और सर्च और छापे में जब्त की गई सामग्री की कॉपी प्राप्त करने का हकदार है।
प्राचा ने कहा कि मामले में दो व्यापक मुद्दे शामिल हैं- पहला, मामले में एक झूठी शिकायत दर्ज की गई थी और दूसरा, ईमेल खाते के आउटबॉक्स के मेटा डाटा से संबंधित है जिसमें कथित तौर पर दस्तावेजों को भेजने के लिए इस्तेमाल किया गया था। प्राचा ने कहा आधी रात के बाद भी तलाशी जारी रही।
प्राचा ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने मेरे सहयोग से मेरे आउटबॉक्स सर्च किए और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में दस्तावेज इकट्ठा किए। उन्होंने खुद को आधे सर्च वारंट से संतुष्ट किया। प्राचा ने कहा कि इस तरह के फुटेज भी एक स्वीकार्य सबूत हैं क्योंकि कथित संदिग्ध शिकायत की पूरी प्रक्रिया बनाई गई वीडियो में दिखाई दे रही है।
यह वीडियो फुटेज न केवल सर्च और जब्ती का हिस्सा है क्योंकि यह रिकॉर्ड किया गया था बल्कि इसलिए भी कि जब पुलिस द्वारा सर्च किया जा रहा था उसका वीडियोग्राफी मेरे कंप्यूटर में रिकॉर्ड की गई थी।