एम्स ने 30 मरीजों के सैंपल की जांच की, रिपोर्ट में आया सामने मामला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत में आई फ्लू के लिए एडिनो वायरस जिम्मेदार है। इस साल तेजी से बढ़ते आई फ्लू के मामलों को देखते हुए एम्स ने इसकी जांच की। एम्स के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र में आए आई फ्लू के पीड़ित 30 मरीजों के सैंपल की कल्चर जांच की गई। जांच में पता चला कि उत्तर भारत में संक्रमण तेजी से फैलने का कारण कोई नया वायरस नहीं है, न ही वायरस का कोई नया स्ट्रेन है।
इस बारे में एम्स के आरपी सेंटर के प्रमुख डॉ. जेएस टिटियाल ने बताया कि कई साल से एडिनो वायरस के कारण आई फ्लू के मामले आते रहे हैं, लेकिन इस बार संक्रमण ज्यादा देखने को मिल रहा है। पिछले एक सप्ताह से मामले काफी ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। इस बार देखा जा रहा है कि संक्रमण बहुत तेजी से फैला है। उनका कहना है कि दो सप्ताह बाद संक्रमण कम हो जाता है। ऐसे में हम उम्मीद कर सकते हैं कि अगले सप्ताह से कुछ राहत मिलनी शुरू हो जाएगी।
अन्य वायरस भी जिम्मेदार
डाॅ. टिटियाल ने कहा कि आई फ्लू के लिए हर्पीज व कई अन्य वायरस भी जिम्मेदार होते हैं, लेकिन इस बार हर्पीज का संक्रमण नहीं पाया गया। इस बार 20 से 30 प्रतिशत मामलों में एडिनो वायरस के साथ-साथ स्टाफीलोकोकस बैक्टीरिया का सुपर संक्रमण भी देखा जा रहा है। सेंटर में हर दिन 100 तक मरीज आ रहे हैं। आंखों की इमरजेंसी में पहुंचने वाले कुल मरीजों का करीब 30 प्रतिशत है।
एक फीसदी में धब्बे
डॉ. टिटियाल ने कहा कि इमरजेंसी में आने वाले करीब एक फीसदी मरीजों के कॉर्निया पर धब्बे
पाए जा रहे हैं। इससे आंख की रोशनी कमजोर हो सकती है। ऐसे में मरीज को इमरजेंसी से छुट्टी देने के तीन दिन बाद दोबारा जांच की जा रही है। आरपी सेंटर ने इलाज का दिशा निर्देश तैयार किया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आंखों के उपचार में स्टेरायड दे रहे हैं जिससे नुकसान हो रहा है। ऐसे में एम्स ने इलाज में स्टेरॉयड को शामिल नहीं किया है। बहुत जरूरी होने पर ही स्टेराॅयड देना चाहिए।