आम आदमी पार्टी (आप) ने पूरे देश में कोरोना की जांच का दायरा बढ़ाने की केंद्र सरकार से मांग की है। पार्टी का कहना है कि बेशक अभी तीन लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हुए हैं, लेकिन सीमित पैमाने पर जांच होने से अभी तक वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आई है।
आप सांसद संजय सिंह ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को पत्र लिखकर आईसीएमआर की गाइड लाइन में बदलाव की बात कही है। संजय सिंह के मुताबिक, यदि किसी को दिल, किडनी, लीवर समेत दूसरी कोई भी बीमारी है तो वह बिना किसी बंदिश के उसकी जांच करा लेता है। महीने, तीन या चार महीने में इन और इसी तरह के दूसरे रोगों के मरीज नियमित जांच कराते हैं। कोरोना संक्रमण भी इसी ढर्रे पर है। ऐसे में इस टेस्ट को कराने के लिए इतने तरह के नियम, कानून और बाध्यताएं क्यों है? बीमारी का सरकारीकरण बंद होना चाहिए।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को भेजे गए पत्र में संजय सिंह ने लिखा है कि आईसीएमआर की गाइडलाइन को बदला जाए। कोई भी व्यक्ति, जिसे आशंका है कि उसे कोरोना हो सकता है या उसे बुखार व खांसी है, उसे किसी भी तरह की परेशानी महसूस हो सकती है तो वह पैथोलॉजी में जांच कराए।
साथ ही कहा पूरे देश में अधिक से अधिक पैथोलॉजी को लाइसेंस दिया जाए और सभी राज्यों को अधिक से अधिक टेस्टिंग किट दी जाए, वरना हम आग के गोले पर बैठकर विस्फोट का इंतजार कर रहे हैं। बगैर जांच यह पता नहीं चल सकेगा कि देश में कितने लोगों को कोरोना हुआ है, जबकि जानकारी मिलने के बाद ही लोग अपने आप को आइसोलेशन में रखेंगे, होम क्वारंटीन होंगे या अस्पताल में जाएंगे।
संजय सिंह ने कहा कि आज किसी की आलोचना और निंदा करने का सवाल नहीं है। फिर भी, कहा जा रहा है कि दिल्ली में कोरोना बढ़ गया है। दिल्ली में इसलिए बढ़ गया है क्योंकि यहां जांच अधिक हो रही है। प्रति मिलियन हम 12 हजार से ज्यादा लोगों की जांच कर रहे हैं।