ई दिल्ली। आर्थिक अपराध शाखा ने आकर्षक ब्याज का झांसा देकर पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा के लोगों से सात करोड़ की ठगी करने वाले आरोपी कपिल देव पसरीचा को 9 साल बाद देहरादून के टिहरी गढ़वाल से गिरफ्तार किया है। आरोपी लोगों से अपनी कंपनी में करोड़ों रुपये का निवेश करवाकर कार्यालय बंद करके फरार हो गया था।
पुलिस के शिकायत दर्ज नहीं करने पर पीड़ितों ने अदालत से गुहार लगाई थी। सितंबर 2012 में तीस हजारी अदालत के निर्देश पर आर्थिक अपराध शाखा ने इस बाबत मामला दर्ज किया था। दिल्ली के केशवपुरम निवासी कपिल देव पसरीचा टिहरी गढ़वाल में नाम बदलकर रह रहा था। उसने अपना नाम कपिल शर्मा रख लिया था। पुलिस आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।
शाखा के संयुक्त आयुक्त डॉ. ओपी मिश्रा ने बताया कि पीड़िता रेखा पॉल, सुबोध मंडल और अरिंदम डे की शिकायत पर तीस हजारी अदालत ने कपिल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। शिकायत में कहा गया कि कपिल का मनी भंडार (बीपी जूलर्स प्राइवेट लिमिटेड) के नाम से जनकपुरी के जैन टावर और पश्चिम विहार के मीराबाग में कार्यालय था। कपिल ने लोगों से उसकी कंपनी में रुपये निवेश करने पर आकर्षक ब्याज देने का आश्वासन दिया। झांसे में आकर स्कीम में पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा के लोगों ने करोड़ों रुपये का निवेश किया, लेकिन एक दिन कपिल कार्यालय बंद कर फरार हो गया।
पुलिस टीम ने मनी भंडार के तीन बैंकों के दस्तावेज की जांच की। खुलासा हुआ कि कपिल कंपनी के बैंक खातों का अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता था। कंपनी लोगों से पैसा एकत्र करने के लिए अधिकृत नहीं थी। जांच में पता चला कि आरोपी ने लोगों के पैसों को मौज-मस्ती पर खर्च कर दिया। किसी भी पीड़ित के पास आरोपी के घर का पता नहीं था। पुलिस ने उसके परिचितों के जरिये छानबीन शुरू की। पुलिस को पता चला कि आरोपी हरिद्वार स्थित आशाराम बापू के आश्रम में है। पुलिस ने वहां छापा मारा, लेकिन आरोपी नहीं मिला। इसके बाद पुलिस टीम ने शनिवार को उसे टिहरी गढ़वाल के धलवाला से गिरफ्तार कर लिया।