कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़े देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली पुलिस समेत देश की सुरक्षा एजेंसियों ने तकनीक-आधारित निगरानी और कार्रवाई का एक खास अभियान शुरू किया। इसमें बड़े पैमाने पर ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (ओएसआईएनटी), मेटाडेटा की जांच, व्यवहार का विश्लेषण और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल रहे एआई-जनरेटेड और डीपफेक सामग्री की फोरेंसिक जांच शामिल थी।
इस निगरानी प्रक्रिया के दौरान महाराष्ट्र साइबर ने सोशल मीडिया खातों के एक ऐसे सुनियोजित नेटवर्क की पहचान की जो गलत, भ्रामक और एआई-जनरेटेड सामग्री फैला रहे थे। इनका मकसद लोगों की राय को प्रभावित करना, भ्रम पैदा करना, अशांति भड़काना और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना था। तकनीकी विश्लेषण से यह भी पता चला कि इसमें भारत के बाहर से (खासकर पाकिस्तान और कुछ मध्य-पूर्वी देशों से) काम करने वाले असामाजिक तत्व शामिल थे, जो भारतीय दर्शकों को निशाना बनाकर भ्रामक कथानक को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे थे।
दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था-एक) देवेश चंद श्रीवास्तव ने कहा कि भ्रामक वीडियो डालने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि आपत्तिजनक पोस्ट को हटाया जा रहा है। पुलिस विभिन्न मंचों पर साझा किए गए पोस्ट, वीडियो और टिप्पणियों की जांच कर रही है ।
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि आपत्तिजनक और अवैध सामग्री को हटाने की कार्रवाई एक सतत प्रक्रिया है। प्रदर्शन की निगरानी के दौरान दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान से जुड़े 480 से अधिक सोशल मीडिया खातों की पहचान की है, जो प्रदर्शन से संबंधित फर्जी कथानक, अफवाहें और एआई से तैयार किए गए फर्जी वीडियो प्रसारित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से जुड़े ये वही सोशल मीडिया खाते हैं जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी सक्रिय थे। हमारी टीमें इन खातों से जुड़े आईपी पते की भी जांच कर रही हैं।
विशेष टीमें ऐसे सोशल मीडिया खातों की पहचान कर रही हैं, जिन्होंने कथित रूप से अपमानजनक भाषा, भ्रामक जानकारी या संबंधित कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने वाली सामग्री साझा की है। अधिकारी ने कहा कि हमारी टीमें प्रत्येक वीडियो की बारीकी से निगरानी कर रही हैं और फर्जी, डीपफेक तथा अवैध सामग्री साझा करने वाले सोशल मीडिया खातों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
डीसीपी के इस्तीफे वाली खबर फर्जी
दिल्ली पुलिस ने हाल में प्रसारित एक डीपफेक वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सुमित झा के छात्र प्रदर्शन के कारण इस्तीफा देने का दावा करने वाला वायरल वीडियो पूरी तरह फर्जी है और एआई से तैयार किया गया है। पुलिस ने अधिकारी का वास्तविक वीडियो भी साझा किया।
100 खाते भारत के बाहर से चल रहे थे
तकनीकी जांच से पता चला कि लगभग 100 खाते भारत के बाहर से संचालित हो रहे थे। आगे के विश्लेषण से यह स्थापित हुआ कि 140 से अधिक पोस्ट और प्रोफाइल में एआई-जनरेटेड या एआई-सहायता प्राप्त सामग्री शामिल था, जिसकी पहचान और पुष्टि महाराष्ट्र साइबर के अत्याधुनिक ऑडियो-वीडियो फोरेंसिक विश्लेषण टूल का उपयोग करके वैज्ञानिक रूप से की गई।
बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए दृश्य
पहचाने गए एआई-जनरेटेड सामग्री की विस्तृत तकनीकी जांच से पता चला कि इसमें भीड़ के डिजिटल रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए दृश्य, सिंथेटिक आवाज बनाना, क्लोन किया गया ऑडियो और सार्वजनिक हस्तियों से गलत तरीके से जोड़े गए हेरफेर किए गए वीडियो शामिल थे। प्रतिनिधि सोशल मीडिया खाते और उनसे संबंधित एआई-जनरेटेड सामग्री नीचे दिए गए हैं।