2020 में हुए दिल्ली दंगे देश के विभाजन के वक्त हुए नरसंहार की याद दिलाने वाले हैं। यह मार्मिक टिप्पणी अदालत ने एक आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए की है। दंगों के दौरान आरोपी सिराज अहमद खान ने एक लड़के पर केवल इसलिए हमला किया था क्योंकि वह दूसरे समुदाय से था। उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए जमानत मांगते हुए कहा कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है।
कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए गौर किया कि उस पर गंभीर आरोप हैं। वहीं अपराध की पूरी साजिश का खुलासा करने के लिए उसकी मौजूदगी जरूरी है।
अदालत ने अपने 29 अप्रैल के आदेश में कहा कि 24 व 25 फरवरी 2020 को सांप्रदायिक दंगों ने उत्तर पूर्वी दिल्ली को जकड़ लिया था। इन दंगों ने देश के विभाजन के समय हुए नरसंहार की याद दिला दी। ये दंगे जंगल की आग की तरह कई इलाकों में फैल गए और कई मासूम जिंदगियों को निगल लिया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दंगाइयों की भीड़ ने 25 फरवरी को एक लड़के रमन पर तलवारों व डंडों से केवल इसलिए हमला किया था क्योंकि वह दूसरे समुदाय से संबंध रखता था। जांच अधिकारी ने याचिका पर जो जवाब दाखिल किया है उसके अनुसार आरोपी साफ तौर पर सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है। उसके हाथ में भाला है। इसके अलावा उसके दो बेटे अरमान और अमन भी इस मामले में आरोपी हैं और अभी तक फरार हैं।
पेश मामले में नाम सामने आने के बाद से ही सिराज अहमद खान भी फरार है। अदालत ने उसे दिसंबर 2020 में भगोड़ा घोषित कर दिया था। मामले में अन्य आरोपियों को जमानत मिले होने के तथ्य से आरोपी के आचरण साफ नहीं हो जाता क्योंकि वह नाम सामने आने के बाद से ही फरार है।