कोरोना संक्रमण की इस लहर का राजधानी पर कहर कुछ ऐसा है कि रोज सैकड़ों लोगों की जान जा रही है। हालात ऐसे हैं कि श्मशान घाट में शवों के अंतिम संस्कार के लिए भी 20 घंटे की वेटिंग है। मंगलवार को सिविल लाइंस स्थित मेेस्सी अंतिम संस्कार केंद्र में टीन शेड के नीचे बने प्लेटफार्मों पर 50 चिताएं जल रही थीं। केंद्र के आसपास, फर्श पर शव लावारिस जैसे पड़े थे। पार्किंग में अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर आए परिजनों के वाहनों की लंबी कतार थी।
केंद्र की मालकिन विनीता मेस्सी ने कहा कि उन्होंने जीवन में ऐसा भयानक मंजर नहीं देखा था। लोग परिजनों के शवों को लेकर अंतिम संस्कार के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। सभी श्मशान घाटों में शवों को जलाने के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है। सरकारी आंकड़ों को मानें तो इस महीने 3601 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। इनमें से केवल सात दिन में 2267 लोगों ने जान गंवाई है।
पश्चिमी दिल्ली के अशोक नगर निवासी युवा व्यवसायी अमन अरोड़ा ने सोमवार को पिता एमएल अरोड़ा को दिल का दौरा पड़ने से खो दिया। अमन ने बताया कि पिता को सीने में तकलीफ महसूस हुई तो वे उन्हें लेकर कई निजी अस्पतालों में गए। सभी जगह उन्हें भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। आखिर उनकी जान चली गई।
सोमवार को वे पिता का शव लेकर अंतिम संस्कार करने के लिए पश्चिमी दिल्ली के सुभाष नगर श्मशान घाट पर पहुंचे तो वहां पता चला कि लंबी वेटिंग है। उन्हें अंतिम संस्कार के लिए मंगलवार का समय दिया गया। उन्हें डर था कि तब तक पिता केे शव में सड़न शुरू हो सकती है। उन्होंने पिता के शव को सड़ने से रोकने के लिए किराए पर रेफ्रिजरेटर की व्यवस्था की।