कारीगरों की आवाज और हुनर बताने के लिए मेले में ही पॉडकास्ट स्टूडियो बनाया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
ट्रेड फेयर में खादी इंडिया पवेलियन में लगे 150 स्टॉल न सिर्फ खादी की नई पहचान दिखा रहे हैं, बल्कि यह भी साबित कर रहे हैं कि खादी अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की आर्थिक ताकत बन चुकी है।
हॉल नंबर-6 में बने पवेलियन में देशी चरखा, पेटी चरखा, बिजली चालित कुम्हार चाक, कच्ची घानी तेल पेराई का लाइव डेमो ध्यान खींच रहा। खादी के कपड़े, प्राकृतिक सौंदर्य, हस्तशिल्प, बांस और बेंत की पारंपरिक नक्काशीदार कलाकृतियां पवेलियन की ताकत हैं। कश्मीर की पश्मीना शॉल, राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश की परंपरागत मिठाइयां, अचार मुरब्बे, दक्षिण भारत की कांचीपुरम सिल्क साड़ियां, आंध्र प्रदेश की लकड़ी की नक्काशी, झारखंड की प्राकृतिक स्किनकेयर श्रृंखला और दिल्ली, हरियाणा, पंजाब की खादी व हैंडलूम फैशन रेंज भी है। शहद, हर्बल टी, आयुर्वेदिक मेकअप और इत्र, पानी की बोतलें, मंदिर लैम्प, पेन स्टैंड, बैग, चटाइयां लुभा रही हैं।
युवा उद्यमियों की प्रेरक कहानियां
पवेलियन में ऐसे युवा उद्यमी हैं, जिन्होंने पीएमईजीपी के साथ काम किया और लाखों रुपये का टर्नओवर हासिल किया है। खादी के चेयरमैन मनोज कुमार ने बुधवार को कई युवाओं से बातचीत की। युवा उद्यमी यशप्रीत कौर ने बताया कि पिछले साल ट्रेड फेयर में वे घूमने आई थीं, तब उन्हें अपना काम शुरू करने का आइडिया आया। उन्होंने पुरानी उपचार परंपरा पर आधारित वेलनेस स्टार्टअप उर्वरता शुरू किया। इस साल ट्रेड फेयर में खादी के साथ उन्होंने स्टाॅल लगाया। इनमें केमिकल फ्री थैरेप्यूटिक फुट सोक, हर्बल ब्लेंड्स, ऑरा-क्लींजिंग जैसे उत्पाद शामिल हैं। चेयरमैन ने इन्हें प्रोत्साहित किया और कहा कि मदद के लिए कभी भी राजघाट पर खादी कार्यालय आ सकती हैं।
बात खादी की नाम से पॉडकास्ट स्टूडियो बना
पवेलियन में पहली बार बात खादी की नाम से पॉडकास्ट स्टूडियो बना है, जहां युवा उद्यमी और कारीगर अपनी यात्रा, संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा कर रहे हैं। खादी के चेयरमैन ने कहा कि 11 साल में खादी विश्वसनीय ब्रांड बन गया है। खादी ग्रामोद्योग ने करीब 2 करोड़ लोगों को रोजगार दिया और कारोबार 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। इसे 2 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य है।