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डीयू के 100 साल : शिक्षा और साहित्य का शानदार सफर, दी हैं कई शख्सियतें, शताब्दी वर्ष समारोह आज

Sun, 01 May 2022 04:47 AM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

जिन छात्रों ने अभी तक अपनी डिग्री पूरी नहीं की है, उनके लिए रविवार से पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर रहा है। हालांकि, विश्वविद्यालय की ओर से अभी तक पंजीकरण प्रक्रिया समाप्त होने की तिथि की घोषणा नहीं की गई है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली विश्वविद्यालय आज अपना शताब्दी वर्ष समारोह मना रहा है। शिक्षा और साहित्य के बूते दुनियाभर में अपनी पहचान बनाने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय ने कई शख्सियतें दी हैं। संस्कृति, परंपरा और सरोकारों के इस संस्थान ने आजादी आंदोलन के दौरान कई उतार-चढ़ाव का सामना भी किया, लेकिन मजबूत प्रबंधन और कार्यशैली इसे प्रगति के पथ पर ले जाती रही। नतीजतन, आज यह अपना शताब्दी समारोह हर्षोल्लास के साथ मना रहा है। पेश है अमर उजाला की खास रिपोर्ट...

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डिग्री पूरी करने के लिए आज से पंजीकरण शुरू
जिन छात्रों ने अभी तक अपनी डिग्री पूरी नहीं की है, उनके लिए रविवार से पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर रहा है। हालांकि, विश्वविद्यालय की ओर से अभी तक पंजीकरण प्रक्रिया समाप्त होने की तिथि की घोषणा नहीं की गई है। डीयू रजिस्ट्रार विकास गुप्ता के मुताबिक, इस प्रक्रिया में पहले छात्रों की ओर से मिलने वाली प्रतिक्रिया को देखा जाएगा, फिर विश्वविद्यालय अपने आगे की रणनीति तय करेगा। मार्च में कुलपति योगेश सिंह ने घोषणा की थी कि जो छात्र डीयू से अपनी डिग्री को पूरा नहीं कर सके हैं, उन्हें शताब्दी वर्ष के दौरान डिग्री पूरा करने का अवसर दिया जाएगा।

अतीत से आज तक हमसफर हैं...तीन महाविद्यालय
91 संबद्ध कॉलेज के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में इस वक्त बेशक सात लाख छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं, लेकिन एक मई 1922 को तीन कॉलेजों व 750 बच्चों के साथ इसकी शुरुआत हुई थी। इनके नाम हैं जाकिर हुसैन, सेंट स्टीफंस और हिंदू कॉलेज। तीनों महाविद्यालय डीयू से पहले अस्तित्व में थे। 
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जाकिर हुसैन कॉलेज
इस कॉलेज को पहले दिल्ली कॉलेज और एंग्लो अरबी कॉलेज के नाम से जाना जाता था। इसकी स्थापना 17वीं सदी के आखिरी दशक में मुगल सम्राट औरंगजेब के दक्कन के अमीर और हैदराबाद के पहले निजाम के पिता गाजीउद्दीन खान ने की थी। उस समय इसे मदरसा गाजीउद्दीन खान नाम से जाना जाता था। हालांकि, मुगल साम्राज्य के कमजोर पड़ने के साथ मदरसा को बंद करना पड़ा। थोड़े समय बाद 1972 में दिल्लीवालों ने साहित्य, विज्ञान और कला के लिए इस कॉलेज की स्थापना की। बाद में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के अशिक्षित लोगों के उत्थान के लिए अंग्रेजी भाषा और साहित्य में पाठ्यक्रम पढ़ाना शुरू किया। यह निर्णय चार्ल्स ट्रेवेलियन ने लिया था। वर्ष 1975 में इंदिरा गांधी के समय की सरकार ने प्रसिद्ध शिक्षक और भारत के राष्ट्रपति रहे डॉ. जाकिर हुसैन के नाम पर कॉलेज का नाम बदल दिया था। डीयू का यह एकमात्र कॉलेज है, जो बीए-ऑनर्स अरबी और फारसी में डिग्री प्रदान करता है। 

यहां से निकलीं कई हस्तियां : कॉलेज से प्रसिद्ध उर्दू लेखक अली सरदार जाफरी और दिल्ली के नेता चौधरी प्रेम सिंह पढ़े हुए हैं, जिन्होंने एक ही पार्टी और निर्वाचन क्षेत्र से 12 बार जीत हासिल की थी। प्रेम सिंह ने लगातार 55 साल तक अजेय रहते हुए लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था।  

सेंट स्टीफंस कॉलेज, स्थापना वर्ष : 1881
यह कॉलेज कला और विज्ञान वर्ग में उत्कृष्ट शिक्षाविदों के लिए जाना जाता है। एक फरवरी 1881 में कॉलेज की स्थापना कैम्ब्रिज मिशन ने की थी। मिशन कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से स्नातकों का एक समूह था। कॉलेज की स्थापना का मकसद भारत में अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा देना था। उस समय इसके लिए ब्रिटिश भारत सरकार द्वारा आदेश दिया गया था। कॉलेज में रेवरेंड सैमुअल स्कॉट ऑलनट ने पहले प्रिंसिपल के तौर पर अपनी सेवाएं दी। 1922 में दिल्ली विश्वविद्यालय के अस्तित्व में आने के बाद कॉलेज विश्वविद्यालय के अंतर्गत आ गया।

यहां से निकले कई दिग्गज:  इस कॉलेज से ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के प्रमुख राजनेता सर छोटू राम, प्रतिष्ठित लेखक खुशवंत सिंह और कैबिनेट मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर पढ़कर निकले हैं।

हिंदू कॉलेज, स्थापना वर्ष : 1899
हिंदी कॉलेज विज्ञान, मानविकी, वाणिज्य और सामाजिक विज्ञान में विभिन्न स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए जाना जाता है। कॉलेज की स्थापना आधिकारिक तौर पर कृष्ण दासजी गुरवाले ने ब्रिटिश राज के खिलाफ राष्ट्रवादी संघर्ष को लेकर की थी। स्थापना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को राष्ट्रवादी शिक्षा देना था। कॉलेज स्वतंत्रता संग्राम और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बौद्धिक और राजनीतिक बहस का गवाह भी रहा है। इस दौरान कुछ प्रोफेसरों और छात्रों को गिरफ्तार भी कर लिया गया था और कॉलेज कुछ महीनो तक बंद भी रहा था।  

यहां से ये निकली ये शख्सियत : कॉलेज से रूडू लेखक मिर्जा फरहतुल्ला बेग, राजनीतिज्ञ व अर्थशास्त्री सुब्रमण्यम स्वामी और फिल्म लेखक व निर्देशक इम्तियाज अली पढ़े हुए हैं।

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