राजधानी में हरदिन 11000 टन कचरा पैदा होता है और अभी इसमें से 7-8 हजार टन कचरा संसाधित हो पाता है। बाकी बचा हुआ 3-4 हजार टन कचरा सीधा दिल्ली की तीन लैंडफिल साइटों पर डंप किया जा रहा है। कूड़े के पहाड़ों पर कचरे को संसाधित जरूर किया जा रहा, लेकिन इसी तीव्रता से यहां नया कचरा एकत्रित भी हो रहा। इस प्रकार दिल्ली में कूड़े के पहाड़ों को जड़ से खत्म करना किसी सपने जैसा है। लेकिन सारी कॉलोनियों को जीरो वेस्ट बनाकर इस सपने को साकार किया जा सकता है।
अब तक 350 कॉलोनियां बनीं जीरो वेस्ट
करीब नौ महीने के भीतर करीब 350 कॉलोनियां जीरो वेस्ट बन चुकी हैं। ये 100% कचरे को संसाधित कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस पर 127 आरडब्ल्यूए, एनजीओ या निजी समूहों को मेयर डॉ शैली ओबरॉय ने जीरो वेस्ट कॉलोनी का प्रमाण पत्र दिया। इन्हें संपत्तिकर में 5% की अतिरिक्त छूट मिलेगी।
जीरो वेस्ट कॉलोनी ही विकल्प - मेयर
मेयर डॉ शैली ओबरॉय ने कहा कि 12 जोन में हरेक वार्ड में जीरो वेस्ट कॉलोनी के लिए आरडब्ल्यूए के साथ पार्षद मीटिंग करेंगे। हमें नए कूड़े के समाधान के लिए ऐसा करना पड़ेगा। बिना आरडब्ल्यूए और स्वयं सहायता समूहों के ये काम सफल नहीं होगा।