फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi NCR News: जरी-गोटा मंहगा, शादियों की चमक पड़ी फीकी

विज्ञापन
विज्ञापन
-कपड़ों को सजाने वाली प्लास्टिक से बनी जरी की कीमतें बढ़ीं
विज्ञापन



संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया युद्ध का असर अब दिल्ली-एनसीआर की शादियों में खरीददारी पर भी दिखाई देने लगा है। कपड़ों की सजावट में इस्तेमाल होने वाले जरी-गोटा के महंगे होने से इसकी चमक धुंधली हो गई है। कारोबारियों का कहना है कि प्लास्टिक से बनने वाली जरी-गोटा की सप्लाई चेन इस समय बाधित है। इससे कपड़ों की कढ़ाई महंगी हो गई है। फिर, जहां इसे पहले की तरह लगाया जा रहा है, वह कपड़े महंगे हो गए है। जिससे मांग में कमी आई है। हालात यह है कि शादियों के सीजन में भी बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है।
जरी-गोटा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई धागे और शादियों के सजावट का अधिकतर सामान प्लास्टिक दानों से तैयार होता है। ईधन की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन बाधित होने से कारण आयत-निर्यात दोनों पर असर पड़ा है। जिससे प्लास्टिक दानों की कीमत में बढ़ गयी है। इस कारण साड़ी और सूट की लागत में बढ़ोतरी हुई है। जिससे कीमतें बढ़ रही हैं और मांग भी प्रभावित हो रही है। कारीगरों को काम कम मिलने के कारण उनकी आय में गिरावट आई है।
विज्ञापन






चांदनी चौक, सदर बाजार जैसे के दुकानदारों का कहना कि कच्चे माल में बढ़ोतरी के कारण थोक कीमतों में 15-20 फीसदी का उछाल आया है। वह चाह कर भी कीमतें नहीं बढ़ा पा रहे हैं। कीमतें बढ़ने पर ग्राहक खरीदारी ही नहीं करेगा। उनका कहना है कि वह एकमुश्त ऑर्डर नहीं दे पा रहे हैं और उनके काम में 50 फीसदी की गिरावट आई है। कारोबारियों का कहना है कि वह जल्द ही शांति की उम्मीद कर रहे हैं। अगर कच्चे माल की कीमतों और तेल में इजाफा होता रहा तो वह भी दाम बढ़ाने पर मजबूर हो जाएंगे।
विज्ञापन




-



कोट्स



- काम आधा हो गया है। एक्सपोर्ट में 50 फीसदी की गिरावट आई है। अब बाहर से खरीदार कम आ रहे हैं। - राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता (प्रधान जरी-गोटा एसोसिएशन, चांदनी चौक)





-युद्ध से दाम 20 फीसदी बढ़ गया है। समान अभी भी पुराने रेट पर बेच रहे हैं। इससे मुनाफा घट रहा है। -राकेश शर्मा (स्थानीय दुकानदार, चांदनी चौक)



-शादी के लिए 3-4 साड़ियां और सूट लेना था, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण बजट कम करना पड़ा है। -रीतू शर्मा (ग्राहक, चांदनी चौक)





-हर चीज महंगी हो गई है। इसलिए अब मजबूरी में कम सजावट वाली साड़िया लेनी पड़ रही है। -सोनम गुप्ता (ग्राहक, सदर बाजार)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें